अगरतला। त्रिपुरा पुलिस ने तीन उग्रवादियों के जेल से फरार होने के बाद सीमा सुरक्षा बल(बीएसएफ) तथा पड़ोसी राज्य मिजोरम की पुलिस से उनकी धड़पकड़ के लिए सहायता मांगी है। तीनों फरार उग्रवादियों ने सितंबर 2020 में लिटन दास नामक व्यक्ति का उसके आवास से अपहरण कर हत्या कर दी थी। कई महीनों के बाद मिजोरम-त्रिपुरा सीमा के घने जंगलों से उनके शव को बरामद किया गया था तथा पुलिस ने इस हत्या के मामले में तीनों को आरोपी बनाया था। 

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जानकारी के अनुसार, पुलिस कुल छह आरोपियों को धर्मनगर की उत्तरी त्रिपुरा जिला अदालत में पेश कर वापस जेल ला रही थी जिसके बाद तीन उग्रवादी जेल वाहन(वैन) से पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हुए। फरार उग्रवादियों की पहचान कंचनपुर निवासी ङ्क्षसघामोनी रियांग, जिबन रियांग और लालथंगा रियांग के रूप में की गयी है। इस पूरे मामले में जेल प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आयी है जिसकी जांच की जा रही है। सुरक्षा कर्मियों ने वाहन के दरवाजे को लॉक किए बगैर ही जेल का दरवाजा खोल दिया। जिसके बाद उग्रवादियों को भागने का मौका मिल गया। 

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नियमों के अनुसार, कैदियों को बाहर ले जाने वाला वाहन जब जेल के दूसरे दरवाजे के अंदर प्रवेश करता है तब वाहन के दरवाजे को खोलने से पहले प्रवेश के सभी दरवाजों (पहले तथा दूसरे) को बंद किया जाता है, जिसके बाद ही वाहन के दरवाजे खोले जाते है तथा जब तक कैदी अपने सेल में नहीं जाता तब तक वाहन बाहर नहीं निकलता है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस घटना में वाहन को दूसरे गेट के अंदर प्रवेश करने के बाद पहले प्रवेश गेट को खुला छोड़ दिया गया और वाहन का दरवाजा भी खुला था जिससे उग्रवादियों को जेल से फरार होने का रास्ता साफ हो गया। 

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जेल प्राधिकरण ने इस घटना से जुड़े सभी जिम्मेदार पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर जांच का आदेश दे दिया है। पुलिस ने त्रिपुरा के कई ठिकानों पर रात भर छापेमारी की लेकिन उग्रवादियों को पकडऩे में नाकामयाब रही। माना जा रहा है कि सभी ने पश्चिमी मिजोरम के घने जंगलों में शरण ली होगी तथा वहां से सभी भारत-बंगलादेश सीमा पार कर बंगलादेश जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा पुलिस ने पड़ोसी राज्य मिजोरम तथा बीएसएफ से भी सभी को पकडऩे में मदद की मांग की है।