प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए साल पर कुछ राज्यों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट का शिलान्यास करेंगे। योजना के मुताबिक, प्रधानमंत्री 1 जनवरी को त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में लाइट प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। लाइट हाउस प्रोजेक्ट केंद्रीय शहरी मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना है जिसके तहत लोगों को आवास मुहैया कराए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ (देश के हर नागरिक के लिए मकान) का लक्ष्य रखा है। केंद्र सरकार के एजेंडे में भी यह योजना है कि देश के हर नागरिक को पक्का मकान मुहैया कराना है। ‘सभी के लिए घर’ मिशन के तहत केंद्रीय सहायता से लोगों के लिए घर बनाए जा रहे हैं। लाइट हाउस प्रोजेक्ट भी उसी का एक हिस्सा है। त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में जीएचटीसी-इंडिया इनिशिएटिव के तहत पक्का मकान बनाए जाएंगे।

त्रिपुरा की जहां तक बात है तो प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) स्कीम में उत्तर पूर्व और पहाड़ी राज्यों में ‘सबसे अच्छा प्रदर्शन’ करने वाला राज्य घोषित किया गया है। जिन-जिन प्रदेशों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट का शिलान्यास होना है, वहां पहले से तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस प्रोजेक्ट में खास तकनीक का इस्तेमाल कर सस्ते मकान बनाए जाते हैं। दरअसल, इस प्रोजेक्ट में फैक्टरी से बीम-कॉलम और पैनल तैयार कर मौके पर लाए जाते हैं, जिससे निर्माण की अवधि और लागत कम हो जाती है। मकान के निर्माण में समय भी कम लगता है। काम जल्दी होता है, इसलिए प्रोजेक्ट की लागत भी कम होती है।

इस प्रोजेक्ट के तहत जो मकान बनाए जाएंगे, वो पूरी तरह से भूकंपरोधी होंगे। भारत में पहली बार ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। मध्यप्रदेश के इंदौर में इस प्रोजेक्ट की तैयारी तेजी से चल रही है। इसमें जो भी मकान बनेंगे, वो प्लस आठ आकार के होंगे। प्रोजेक्ट में जापानी कंपनी की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है। मकान के लिए अलग-अलग टॉवर बनाए जाएंगे और यह लगभग साल भर में पूरा कर लिया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि जहां निर्माण किया जाना है, वही पर मकान के बीम, कॉलम और पैनल आदि एकसाथ लगाए जाते हैं। इसका निर्माण कहीं और होता है लेकिन जहां मकान बनना होता है, वहां इसे फिट किया जाता है। जैसे अन्य मकानों में बनाने के बाद पानी से तर करना पड़ता है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में बनाए जाने वाले निर्माण में पानी से तरी की जरूरत नहीं पड़ती। इससे पानी की बचत होती है। पर्यावरण के लिहाज से इस प्रोजेक्ट को काफी अच्छा माना जाता है।

इन मकानों का वजन काफी हल्का होता है। हल्के निर्माण होने की वजह से टॉवर पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। इस तकनीक में भूकंप रोधी मकान बनाए जा रहे हैं। इसलिए भूकंप जैसी घटनाओं में ये मकान पूरी तरह से सुरक्षा प्रदान करेंगे।