राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंधित उग्रवादियों का समूह नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT), पड़ोसी बांग्लादेश से काम कर रहा है और त्रिपुरा में फिर से अपने आंदोलन को फैलाने की कोशिश कर रहा है। दरअसल देश का पूर्वोत्तर राज्य, पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ 856 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जिसमें से लगभग 67 किमी का बाड़ लगाना बाकी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने कमांडर दिलीप देबबर्मा के नेतृत्व में NLFT का एक छोटा गुट अगरतला से लगभग 50 किलोमीटर दूर त्रिपुरा के खोवाई जिले में अपना अभियान फिर से शुरू करने का प्रयास कर रहा है। वहीं इस संगठन के एक सलाहकार बिस्वा मोहन देबबर्मा का मिजोरम में होने की संभावना है। NLFT के महासचिव उत्पल देबबर्मा और युवा मामलों, संस्कृति, कृषि के सचिव सचिन देबबर्मा बांग्लादेश में हैं, जबकि एक अन्य स्वयं- स्टाइल कमांडर जैकब हरंगखॉल म्यांमार में है।

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार गोपनीय रिपोर्ट में कहा गया है कि NLFT का कमांडर दिलीप देबबर्मा के नेतृत्व में एक छोटे से समूह का आंदोलन धलाई जिले के गंगानगर, रैश्यबाड़ी, गंडाचेरा और चावमानू और संभवतः खोवाई जिले के कुछ हिस्सों में देखा गया है। मालूम हो कि रिपोर्ट 15 जून को डायरेक्शनल लेवल लीड इंटेलिजेंस एजेंसी (LIA) की 52 वीं बैठक में हुई चर्चा के आधार पर बनाई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के दो ठिकाने बांग्लादेश के रंगमती जिले के सिलचरी और उज्जानचारी में सक्रिय हैं।

इस बैठक में बीएसएफ, त्रिपुरा पुलिस की विशेष शाखा, विशेष ब्यूरो, राजस्व खुफिया निदेशालय, सीमा शुल्क आदि ने सीमा पार अपराधों, प्रतिबंधित वस्तुओं की जब्ती, विभिन्न तस्करी, पूर्वोत्तर क्षेत्र में मार्ग, बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा, उग्रवाद के मुद्दे आदि पर चर्चा की।

NLFT की शुरूआत 12 मार्च 1989 को त्रिपुरा के एजेंडे के साथ हुई थी। इसे 1997 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और फिर आतंकवाद रोकथाम अधिनियम (पोटा) के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, यह संगठन कई हिंसक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार रहा है, जिसमें 317 विद्रोह की घटनाएं शामिल थीं, जिसमें 2005-2015 के बीच 28 सुरक्षा बलों और 62 नागरिकों की जान चली गई थी।