त्रिपुरा में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप देने में देरी को लेकर टिपरा मोथा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में अनिश्चितता है। मोथा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जारी बातचीत बेनतीजा है तथा इसे लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं। मोथा के शाही वंशज प्रद्योत किशोर देबबर्मन ने अभी तक न तो भारतीय जनता पार्टी के साथ और न ही कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सीट शेयरिंग मॉडल के साथ समझौता किया है।

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दिल्ली से एक फेसबुक लाइव में प्रद्योत ने दोहराया कि वह असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सहित भाजपा नेताओं के साथ चर्चा के दौर के बाद ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की अपनी मूल मांग से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने साथ ही यह भी संकेत दिया कि अगर मोथा को लिखित आश्वासन नहीं मिला तो वह अकेले चुनाव लड़ेंगे। प्रद्योत पिछले तीन महीनों से भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठने के लिए राजी कर रहे हैं ताकि ग्रेटर टिपरालैंड की उनकी मांग पर चर्चा की जा सके। उन्होंने अपनी मांग के लिए पिछले महीने जंतर-मंतर पर दो दिवसीय प्रदर्शन भी किया था लेकिन भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।

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मोथा के सूत्रों के अनुसार, प्रद्योत ने शुक्रवार को दिल्ली में हिमंत, भाजपा के राज्य प्रभारी डॉ. महेश शर्मा, पूर्वोत्तर समन्वयक डॉ. संबित पात्रा और तीन अन्य लोगों के साथ एक लंबी बैठक की, जिसमें उनकी मांग के लिए भाजपा से लिखित आश्वासन मांगा गया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बजाय, भाजपा नेताओं ने त्रिपुरा के स्वदेशी लोगों के लिए एडीसी के सशक्तिकरण और अन्य विकास एजेंडे पर एक समझौते पर आने का प्रस्ताव रखा, जिस पर प्रद्योत सहमत नहीं हुए और बैठक बेनतीजा रही। चर्चा को समाप्त करने के लिए वरिष्ठ नेता और टिपरा मोथा के अध्यक्ष बिजॉय कुमार हरंगखल शनिवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गए। सूत्रों ने कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ समझौता करने के लिए बीच का रास्ता निकालने के लिए प्रद्योत के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठेंगे। भाजपा और मोथा के बीच औपचारिक गठबंधन बनाने के लिए प्रद्योत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अप्रत्यक्ष धमकी दी गयी लेकिन प्रद्योत ने न केवल मना कर दिया बल्कि मीडिया के सामने खुलासा भी किया।

राज्य के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि सरकार ने प्रद्योत के दादा बीर बिक्रम माणिक्य के नाम पर अगरतला हवाई अड्डे का नाम बदलकर, हवाई अड्डे पर उनकी प्रतिमा स्थापित कर, बीर बिक्रम के जन्मदिन को राजकीय अवकाश घोषित किया और कई अन्य कदम उठाकर त्रिपुरा के शाही परिवार को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने प्रद्योत की मां से व्यक्तिगत रूप से महल में मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री राज्य में अपनी हर बैठक के दौरान शाही परिवार के योगदान को याद करते हैं, लेकिन प्रद्योत ने अभी तक हमारी भावनाओं का जवाब नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि प्रद्योत और उनकी पार्टी के नेता एक अनावश्यक झगड़े में पड़ गए हैं, हालांकि भाजपा चाहती है आदिवासियों के विकास के लिए उसे अपने साथ एक मंच पर लाएं। इस बीच, माकपा और कांग्रेस ने दावा किया कि वे प्रद्योत के संपर्क में हैं और उनके सभी कदमों को प्रद्योत ने विशेष रूप से समर्थन दिया विशेषकर आने वाले चुनावों में भाजपा विरोधी वोटों के एकीकरण को लेकर। उन्होंने कहा, अगर ग्रेटर टिपरालैंड 125वें संविधान संशोधन विधेयक के प्रस्ताव के अनुसार आदिवासियों के सशक्तिकरण और एडीसी को स्वायत्तता के लिए लंबे समय से संसद में लंबित है, तो हम इसका समर्थन करेंगे। पर अगर इसका मतलब त्रिपुरा का भौगोलिक विभाजन है हम उसके साथ खड़े नहीं हो सकते। चर्चा के दौरान हमने जो समझा, वह भी राज्य का बंटवारा नहीं करना चाहते। हम अभी भी उनकी कॉल का इंतजार कर रहे हैं।