त्रिपुरा (Tripura) में बांग्लादेश में हुई हिंसा का काफी प्रभाव देखने को मिला है। इसी बीच राज्य में सांप्रदायिक तनाव (communal tensions) का जायजा लेने के लिए त्रिपुरा का दौरा करने वाले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अधिवक्ताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कहा है कि हिंसा ने राज्य में "मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया"।


सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता - एहतेशाम हाशमी, अमित श्रीवास्तव, अंसार इंदौरी और मुकेश ने हाल ही में त्रिपुरा (Tripura violence) का दौरा किया था और राज्य में हुई हिंसा पर एक रिपोर्ट जारी की थी। वकीलों के समूह ने यह भी दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली त्रिपुरा सरकार उचित कदम उठाने और हिंसा को फैलने से रोकने के लिए पर्याप्त सक्रिय नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि “इस घटना से चार दिन पहले, मुस्लिम संगठन जमात-ए-उलेमा (हिंद) ने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव (CM Biplab Kumar Dev) से मुलाकात की और उन्हें सूचित किया कि ऐसी घटनाएं हो सकती हैं और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच शांति के लिए खतरा है। इसके बावजूद, सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करना इस हिंसा को प्रायोजित करने के समान है, ”।