भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उपाध्यक्ष रहे मुकुल रॉय एक बार फिर अपने पुराने दल यानी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में वापस आ गए हैं। उन्होंने सीएम ममता बनर्जी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता दोबारा ली। अब इस बात की आशंका जाहिर की जा रही है कि जो लोग रॉय के साथ भाजपा में गए थे क्या वह भी टीएमसी में लौटेंगे? 

बंगाल में तो टीएमसी का दावा है कि रॉय के करीबी 30 विधायक पार्टी में वापस आना चाहते हैं। वहीं बंगाल में हुए इस बदलाव का असर त्रिपुरा में देखने को मिल सकता है। रॉय के वफादर सुदीप रॉय बर्मन भी टीएमसी नेता के साथ भाजपा में चले गए थे। अब जब रॉय वापस टीएमसी में आ गए हैं तो भाजपा इस बात को लेकर आशंकित है कि कहीं बर्मन भी अपने पुराने दल में ना चले जांए।

बंगाल के राजनीति गलियारों में चर्चा है कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के साथ विवादों के चलते सुर्खियों में रहने वाले बर्मन अगर टीएमसी में वापस आए तो त्रिपुरा में सत्ताधारी भाजपा से कुछ विधायक भी उनका साथ दे सकते हैं। त्रिपुरा में एक प्रभावशाली राजनीतिक हस्ती माने जाने वाले बर्मन मुख्यमंत्री पद के लिए देब को चुनने के बाद से भाजपा से नाखुश बताए जाते हैं। वह कांग्रेस में रहते हुए विपक्ष के नेता थे और भाजपा में शामिल होने से पहले लगभग एक साल तक तृणमूल कांग्रेस के साथ रहे थे।

सूत्रों ने कहा कि बर्मन तृणमूल कांग्रेस में लौटने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन अगर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसकी मंजूरी नहीं दी तो वह अपना खुद का संगठन बना सकते हैं और आगामी स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार उतार सकते हैं। उन्होंने पहले ही 'बंधुर नाम सुदीप' नाम का एक संगठन बना लिया है जो राज्य में बीजेपी का विरोध शुरू कर सकता है।

इससे चुनाव से पहले या चुनाव के बाद गठबंधन बनाने के अलावा तृणमूल कांग्रेस का दरवाजा उनके लिए खुला रखने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा पूर्व शाही परिवार के मुखिया प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा के साथ भी बर्मन गठबंधन कर सकते हैं। उनकी पार्टी 'TRIPRA' हाल के स्थानीय चुनावों में बीजेपी को घेरने में कामयाब रही है।