त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने बेलोनिया में माकपा नेता की हत्या की जांच की मांग की है।  सरकार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को पत्र लिखकर माकपा नेता बेनू बिस्वास की हत्या की जांच के लिए एक उच्च शक्ति जांच समिति गठित करने की मांग की।

सरकार ने मृतक बिस्वास के आवास का दौरा करने और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के एक दिन बाद पत्र लिखा।

पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार जो विपक्ष के नेता भी हैं ने कहा कि परिवार के सदस्यों ने उन्हें बताया कि कैसे पिछले 10 फरवरी को कई स्थानीय लोगों के सामने, भाजपा समर्थित गुंडों ने बेनू विश्वास को पीट-पीट कर मार डाला।

सरकार ने लिखा, "प्रत्यक्षदर्शी खातों के अनुसार, राजनगर पंचायत समिति के सदस्य जॉयदेब सरकार, माणिक सरकार, झुटन चक्रवर्ती और नरेश चक्रवर्ती के नेतृत्व में भाजपा समर्थकों के एक गिरोह ने उन पर हमला किया।"

सरकार ने अपने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री देब से पूछा कि क्या माकपा का समर्थन करना अपराध है।

उन्होंने पूछा, "क्या उनके जीने का अधिकार कुछ आतंकवादियों की दया पर निर्भर करता है, क्या सत्ताधारी पार्टी का समर्थन नहीं करने वाले लोगों के जीवन को बचाने के लिए देश का कानून लागू किया जा सकता है?" विधायकों की टीम ने मामले की जांच में कथित पक्षपात के कारण पीआर बारी थाने के प्रभारी अधिकारी अर्जन चकमा को तुरंत हटाने की भी मांग की। 

गौरतलब है कि माणिक सरकार ने सोमवार को दक्षिण त्रिपुरा के कमालपुर जिले में पत्रकारों से कहा, ‘‘पिछले चार वर्षों में माकपा के 24 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई और किसी मामले में न्याय नहीं किया गया। चीजें उस तरह से आगे नहीं बढ़ेंगी जिस तरह से वे (भाजपा-आईपीएफटी) सोचते हैं।’’

राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के शासन के पिछले चार वर्षों के दौरान मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है।