तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख व बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने दावा किया है कि त्रिपुरा में अगली सरकार उनकी पार्टी की होगी। बंगाल की नीतियों को त्रिपुरा में भी लागू किया जाएगा। राज्य के पूर्व सीएम जितेन सरकार ने टीएमसी में शामिल होने के लिए पत्र भेजा है। 

ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि हमें सूचना मिली है कि दार्जिलिंग, तराई व कलिंपोंग के 200 से ज्यादा लोग अफगानिस्तान में फंस गए हैं। बंगाल के मुख्य सचिव विदेश मंत्रालय को इस बारे में पत्र लिख रहे हैं, ताकि इन लोगों की सुरक्षित वापसी हो सके। 

बता दें कि सुष्मिता देव के पिता संतोष मोहन ऐसे सांसद रहे हैं जो पूर्वोत्तर भारत के असम और त्रिपुरा दोनों जगहों पर सक्रिय रहे हैं। वह सात बार में से पांच बार सिलचर से और दो बार त्रिपुरा पश्चिम से भी 1989 और 1991 में सांसद रहे हैं। ऐसे में सुष्मिता देव के लिए त्रिपुरा में अपनी पकड़ बनाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को त्रिपुरा और अन्य राज्यों में विस्तार की कमान सौंपी है। टीएमसी सुष्मिता को आगे लाकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहेगी। वह भी पिता की तर्ज पर अब त्रिपुरा के लोगों को बताएंगी कि यहां से भी उनका पुराना रिश्ता है।

दूसरी ओर, इस साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस की नजरें बीजेपी शासित त्रिपुरा पर हैं। टीएमसी को लगता है कि वह 2023 की शुरुआत में होने वाले चुनाव में मजबूत बढ़त हासिल कर सकती है। इसी के मद्देनजर टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई नेता लगातार त्रिपुरा आ रहे हैं और पार्टी के लिए आधार तैयार करने व संगठन को स्वरूप प्रदान करने में लगे हुए हैं। पार्टी को उम्मीद है कि वाम दलों एवं कांग्रेस द्वारा छोड़े गए स्थान की वजह से मौजूदा सरकार से नाखुश लोग उसका रुख करेंगे और इस तरह टीएमसी राज्य में अपने पैर जमा पाएगी। पार्टी नेताओं की पूर्वोत्तर राज्य में मौजूदगी बीजेपी की पश्चिम बंगाल रणनीति को अपनाने की कोशिश लगती है। टीएमसी का दावा है कि वह सत्ता पर आसानी से काबिज हो जाएगी।