त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव को एक पुलिस कांस्टेबल के बेटे को 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी अनुकम्पा के आधार पर नौकरी नहीं दिए जाने पर फटकार लगायी और जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति अरिंदम लोध की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई पर उस समय नाखुशी जताई, जब सरकारी वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि आकांक्षी को आज ही नौकरी दी जाएगी, क्योंकि गृह सचिव शरदिंदु चौधरी ने याचिकाकर्ता (आंकाक्षी) को नौकरी देने के मामले में तीन बार अनदेखी की थी। 

रिपोर्ट के अनुसार आकांक्षी शुभम दास के पिता नंतु कुमार दास पुलिस विभाग में हेडकांस्टेबल के पद पर तैनात थे और 06 जून 2001 को ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी थी। पिता की ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर शुभम ने नौकरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन बीस साल से अधिक का समय बीतने के बाद याचिकाकर्ता अभी भी पिता के स्थान पर रोजगार की आश लगाए हुए है। सरकारी अधिवक्ता ने मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति का आदेश कल ही पारित हो गया, लेकिन इस तरह की देरी के कारणों से अदालत संतुष्ट नजर नहीं आयी। 

अदालत ने कहा, हम इस अवमानना से याचिका को बंद करने के इच्छुक नहीं हैं क्योंकि इस तरह की तथ्यात्मक घटनाएं अत्यंत परेशान करने वाली हैं। हम कई मौकों पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने के लिए प्रतिवादियों पर भारी जुर्माना लगाने पर विचार कर रहे हैं। अदालत के आदेशों की बार-बार अवमानना के बाद पीठ ने गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव को 23 जून को वर्चुअल मोड के माध्यम से अदालत के सामने उपस्थित रहने के लिए कहा था, मगर सात जुलाई तक इस पर कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। सरकारी वकील ने कल जवाब दाखिल करते हुए अदालत के समक्ष कहा कि विभाग याचिकाकर्ता शुभम को उसी दिन से नियुक्त करने का आदेश जारी करने के लिए तैयार है।