त्रिपुरा में हाल ही में अपनी नौकरी गंवाने वाले स्कूली शिक्षकों के एक संघ ने शुक्रवार को राज्य सरकार से अपील की कि उन्हें लॉकडाउन के दौरान जीविका चलाने के लिए राहत राशि प्रदान करें। उन्हें अप्रैल में सरकार की ओर से 35,000 रुपये की एकमुश्त राशि मिली थी।


'10,323 पीड़ित शिक्षकों के अखिल त्रिपुरा पीड़ित शिक्षक संघ' के अध्यक्ष प्रदीप बानिक ने पत्रकारों से कहा कि मानवीय सहायता के बावजूद, वे गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं और उन्हें फिर मदद की जरूरत है। माकपा नीत वाम मोर्चे की सरकार के समय में 2010 से 10,323 इंटर पास, स्नातक और स्नातकोत्तर उम्मीदवारों को सरकारी स्कूलों में विभिन्न चरणों में शिक्षक नियुक्त किया गया था।


भर्ती को अदालत में चुनौती दी गई और 2014 में त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया को दोषपूर्ण ठहराते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था लेकिन उच्चतम न्यायालय ने मार्च 2017 में उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। 10,323 शिक्षकों में से कई को अन्य नौकरियां मिलीं और वर्तमान में 8,882 शिक्षक ऐसे हैं, जिनके रोजगार की अवधि 31 मार्च को समाप्त हो गई।


मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने एक अप्रैल को कहा था, 'इन शिक्षकों को 35,000 रुपये की एकमुश्त सहायता राशि मिलेगी।' मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया था कि राज्य सरकार ने स्थायी गैर-शिक्षण पदों पर तदर्थ शिक्षकों की भर्ती के लिए उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक विशेष याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार, शिक्षकों को 31 दिसंबर, 2017 के बाद सेवानिवृत्त घोषित किया गया था।


हालाँकि, उन्हें फिर से एक तदर्थ आधार पर नियुक्त किया गया था। मार्च 2018 में भाजपा-आईपीएफटी सरकार के सत्ता में आने के बाद, सरकार ने फिर से उच्चतम न्यायालय में अपील की थी, जिसने उन्हें 31 मार्च, 2020 तक का अंतिम विस्तार दिया था। देब ने कहा था कि राज्य सरकार इन शिक्षकों की समस्या को हल करने की कोशिश करेगी। बानिक ने कहा, 'हम जल्द ही सरकार को एक ज्ञापन सौंपेंगे।'