त्रिपुरा सरकार (Tripura govt.) अंतिम रियासत के शासक बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर (Bir Bikram Kishore Manikya Bahadur) के बारे में मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब द्वारा लिखित पुस्तक के कुछ लेखों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करेगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि "विभाग ने तत्कालीन शासक बीर बिक्रम पर मुख्यमंत्री (CM  Biplab Kumar Deb) की किताब के कुछ अंशों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है।"




उन्होंने कहा कि " 2019 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी की गई देब की पुस्तक से लेख जोड़ने का निर्णय, NGO विवेकानंद विचार मंच के अनुरोध के बाद लिया गया था। हालांकि, अंतिम निर्णय देब के स्वयं प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद किया जाएगा "।


निर्णय पर इतिहासकार और लेखक पन्नालाल रॉय (Pannalal Roy) ने कहा कि "184 शासकों द्वारा 1,355 साल के शासन के अंत में, 15 अक्टूबर, 1949 को, त्रिपुरा की तत्कालीन रियासत एक विलय समझौते के बाद भारत सरकार के नियंत्रण में आ गई। रीजेंट महारानी कंचन प्रभा देवी और भारतीय गवर्नर जनरल के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। रवींद्रनाथ टैगोर 1899 और 1927 के बीच सात से अधिक बार अगरतला गए और रुके थे और नोबेल पुरस्कार विजेता को त्रिपुरा के शासकों द्वारा कई तरह से समर्थन दिया गया था। "

2005 में महाराजा बीर बिक्रम (Maharaja Bir Bikram) पर अपनी पहली पुस्तक लिखने वाले रॉय ने कहा कि त्रिपुरा की युवा पीढ़ी और भारत के अधिकांश लोग "पूर्व त्रिपुरा शाही राजवंश के योगदान और प्रदर्शन" से अवगत नहीं हैं।