त्रिपुरा में विपक्षी दल माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) ने 31 मार्च को राज्यसभा चुनाव (rajya sabha election) के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष माणिक साहा के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा के साथ ही राज्य से संसद की ऊपरी सदन की एकमात्र सीट के लिए अब सीधी लड़ाई नजर रही है। त्रिपुरा में विप्लव कुमार देव के नेतृत्व में भाजपा सरकार है तथा पिछले तीन वर्षों से देव के कामकाज तथा उनके नेतृत्व को लेकर गुटबाजी भी नजर आ रही है। 

यह भी पढ़े : 31 मार्च को शुक्र देव करेंगे राशि परिवर्तन, इन राशियों के अच्छे दिन आएंगे , जमकर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

भाजपा के नेताओं के एक समूह ने हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष साह से मुलाकात की तथा उन्हें पत्र लिखकर इस्तीफे की मांग की जिससे भाजपा की परेशानियां बढ़ गयी है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश भाजपा के कुछ नेता लंबे समय से श्री साहा के प्रदेश अध्यक्ष बने रहने का विरोध कर रहे हैं। वर्ष 2016 में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने श्री देव को पार्टी की राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया था। इसके बावजूद वह चुनाव हार गए थे। अध्यक्ष बनने के बाद देव साहा को प्राथमिक सदस्य के रूप में पार्टी में लाये और जनवरी 2020 में श्री देव के स्थान पर साह प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया था। 

यह भी पढ़े : Love Horoscope : आज अपने प्रेमी को जो कहना है कह दीजिए , दिल की हर बात होगी पूरी, पढ़ें लव राशिफल


मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले गुट ने राम प्रसाद पॉल, प्रद्योत धर और तापस भट्टाचार्जी जैसे भाजपा के पुराने नेताओं को कथित तौर पर पार्टी में दरकिनार किया गया है। उन्होंने बताया कि भगवा पार्टी के लिए चुनाव जीतना कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, लेकिन साहा को भाजपा के सभी 33 विधायकों तथा आठ आईपीएफटी के विधायकों के को सुरक्षित नहीं कर पाते हैं तो पार्टी कके निचले अधिकारियों में बुरा संदेश पहुंचेगा जो अगले साल होने वाले चुनावों में पार्टी के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।