त्रिपुरा में आदिवासी वोट के लिए संघर्ष ने एक और मोड़ ले लिया है। शाही वंशज प्रद्योत किशोर देबबर्मन ने राज्य के अन्य बड़े आदिवासी संगठन आईपीएफटी से हाथ मिलाने की बात कही है। दरअसल दोनों संगठनों से एक हजार से ज्यादा कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद टीआईपीआरए मोथा प्रमुख ने ऐसा कदम उठाया है। 

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बता दें कि त्रिपुरा सरकार में आईपीएफटी भाजपा की सहयोगी है, लेकिन दोनों के बीच संबंध खराब रहे हैं क्योंकि भाजपा अपने दम पर आदिवासी वोट में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। देबबर्मन ने सोशल मीडिया पर दिए एक वीडियो संदेश में कहा कि टीआईपीआरए मोथा और आईपीएफटी की मांग समान है, अलग-अलग पार्टियों से एक ही मांग उठाने का क्या मतलब है? आइए शामिल हों और एक पार्टी बनें। सभी को कुछ न कुछ मिलेगा। 

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बता दें कि कार्यकर्ताओं के भाजपा से जुड़ना टीआईपीआरए (त्रिपुरा स्वदेशी पीपुल्स रीजनल अलायंस) मोथा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल पार्टी ने  पिछले साल त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्रों स्वायत्त विकास परिषद (टीटीएएडीसी) चुनावों में जीत हासिल करके अपनी दमदार शुरुआत की थी। टीआईपीआरए मोथा राज्य के लगभग सभी आदिवासी दलों के प्रतिनिधियों के साथ बनाया गया था।