अगरतला। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव ने शुक्रवार को दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी-इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) सरकार के चार वर्षों के कार्यकाल में राज्य में अपराधों की संख्या में कमी हुई है जबकि राज्य में पिछली सरकार की तुलना में सजा की दर में पिछले चार वर्षों में दोगुनी वृद्धि हुई है। देव ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया, 'राज्य में अपराध दर में गिरावट आई है। मानव आघात से जुड़े अपराधों में 15.26 प्रतिशत की कमी, संपत्ति विवाद में 6.09 प्रतिशत की कमी, महिलाओं से संबंधित अपराधों में 10.18 प्रतिशत की कमी, यातायात दुर्घटनाओं में 7.35 प्रतिशत की कमी तथा अन्य अपराधों में 37.7 प्रतिशत की कमी आई है।' 

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उन्होंने माणिक सरकार के नेतृत्व वाले पिछले वाम मोर्चा शासन के तुलनात्मक अपराध का हवाला देते हुए कहा कि त्रिपुरा पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार 2017 में मानव शरीर के खिलाफ अपराधों के 1,985 मामले सामने आये जो 2020 में घटकर 1,682 हो गए। इसी प्रकार 2017 में संपत्ति अपराध के 525 मामले थे जो 2022 में घटकर 493 मामले रह गये। श्री देव ने कहा कि इसी तरह 2017 में महिलाओं के खिलाफ अपराध 972 दर्ज किए गए और 2020 में घटकर 873 हो गए जबकि 2017 में सड़क यातायात दुर्घटनाएं 503 दर्ज की गईं जो 2020 में गिरकर 466 हो गईं। साथ ही 2017 में अन्य अपराधों के कुल 1,053 मामले दर्ज किए गए जो 2020 में घट कर 655 मामले रह गये। 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि 2018 से केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकारों के शासन के दौरान त्रिपुरा की लड़कियों, महिलाओं और महिलाओं पर अत्याचार से संबंधित घटनाओं में 10.18 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने दावा किया, '' राज्य में शांति स्थापित हुई है तथा राज्य में लोगों के खिलाफ गंभीर अपराधों में 15.28 फीसदी की कमी आई है। राज्य में चार वर्षों में मुकदमों में सजा देने की दर बढ़कर 25 प्रतिशत से अधिक हो गई, जो कि 2018 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले लगभग 13 प्रतिशत थी।' गौरतलब है कि राज्य में 2018 में भाजपा-आईपीएफटी की सरकार सत्ता में आई थी।