त्रिपुरा में विपक्षी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर युवाओं को ड्रग रैकेट में ढकेलने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य में अब सत्तारूढ़ दल के नेताओं के इशारे पर यह कारोबार चल रहा है। 

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माकपा के प्रदेश सचिव जितेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया, बहुत कम ड्रग कारोबारियों को हिरासत में लिया गया है और केवल 20 प्रतिशत ड्रग जब्त किए गए हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता और नेता त्रिपुरा में इस प्रतिबंधित पदार्थ के आयात- निर्यात तथा भांग की खेती में शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि त्रिपुरा में युवाओं के लिए नौकरी और रोजगार का कोई अवसर नहीं है। थोड़ी बहुत गुंजाइश है भी तो बाहरी एजेंसियों को दे दी गई है और भाजपा कार्यकर्ता राज्य भर में नशीली दवाओं के कारोबार, भांग की खेती, मारपीट, चोरी और डकैती के मामलों तथा कई असामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं।

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चौधरी ने कहा कि त्रिपुरा में पिछले तीन वर्षों में भाजपा सदस्यों सहित 1025 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह अपराधियों बहुत छोटी संख्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ के कुछ शीर्ष नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोग ड्रग तस्करी , भांग के कारोबार और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल हैं, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब त्रिपुरा को नशा मुक्त राज्य बनाने के बड़े-बड़े दावे तो कर रहे हैं लेकिन परोक्ष रूप से ड्रग माफियाओं की मदद कर रहे हैं। अब तक जिस किसी को भी गिरफ्तार किया गया है, वह सत्ताधारी पार्टी से संबंधित है। 

उन्होंने कहा, अगर राज्य सरकार को विश्वास है कि उन्होंने नशीली दवाओं के खतरे को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त प्रयास किया है, तो उन्हें स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं राज्य सरकार और मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को एक निष्पक्ष जांच का आदेश देने और श्वेत पत्र के रूप में सटीक डेटा संकलित करने की चुनौती देता हूं। चीजें एकदम साफ हो जाएंगी। कितनी मात्रा में भांग, ब्राउन शुगर और अन्य मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। न जाने कितने युवाओं ने भाजपा के शासनकाल में नशीले पदार्थों की दलदल में फंसकर अपना जीवन बर्बाद किया है।