त्रिपुरा बाल अधिकार संरक्षण आयोग (टीसीपीसीआर) ने बुधवार को बच्चों को उनके अधिकारों और आत्मरक्षा के बारे में जागरूक तथा शिक्षित करने के लिए शिक्षा विभाग के सहयोग से सभी स्कूलों में बाल अधिकार क्लब खोलने की घोषणा की। 

ये भी पढ़ेंः केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक ने कहा - प्रद्योत देबबर्मा की ग्रेटर टिपरालैंड मांग 'विभाजनकारी' है


टीसीपीसीआर अध्यक्ष नीलिमा घोष ने बच्चों के यौन शोषण, बच्चों और किशोरों के बीच नशीले पदार्थों के सेवन तथा अन्य आपराधिक गतिविधियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शैक्षणिक पाठ्यक्रम के अलावा, बच्चों को अपने अधिकारों, आत्म-सुरक्षा तंत्र और उन सभी सामाजिक मुद्दों की जानकारी होनी चाहिए, जिनका उन्हें बदलती परिस्थितियों में रोज सामना करना पड़ता है। त्रिपुरा सरकार के अधीन प्रत्येक स्कूल सभी आयु वर्ग के बच्चों के साथ एक क्लब बनाएगा जहां शिक्षक उन्हें प्रशिक्षण देंगे और आवश्यकता पड़ने पर टीसीपीसीआर चयनित शिक्षकों के लिए कार्यशालाओं की व्यवस्था करेगा। 

ये भी पढ़ेंः त्रिपुरा में स्पेशल एजुकेटर के 200 पदों पर निकली भर्ती, 5 मई तक आवेदन का मौका


क्लब के सदस्यों को उनके साथियों, माता-पिता, शिक्षकों और उनके बड़ों से संबंधित मुद्दों पर बातचीत करने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्लब सामुदायिक स्तर पर बाल विवाह, सामाजिक उत्पीडऩ और बाल श्रम सहित शोषण की अन्य घटनाओं के खिलाफ भी अभियान चलाएगा। उन्होंने कहा, हमने इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री से बात की है और जल्द ही हर स्कूल में क्लब खोलने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हम इन क्लबों को कुछ फंड देंगे, ताकि वे सक्रिय रूप से और जरूरत के मुताबिक काम कर सकें। ये क्लब टीसीपीसीआर की विस्तार इकाई के रूप में काम करेंगे और यदि राज्य के किसी भी हिस्से में किसी भी बच्चे के साथ कोई अपराध या शोषण होता है, तो वे हमें रिपोर्ट करेंगे। यदि आवश्यक हुआ, तो वे तत्काल कार्रवाई के लिए पुलिस से भी सम्पर्क कर सकते हैं। 

टीसीपीसीआर टीम नियमित रूप से घरों, स्कूलों और छात्रावासों का दौरा करेगी, ताकि बच्चों से अकादमिक दबाव सहित उनके व्यक्तिगत मुद्दों के बारे में सीधे प्रतिक्रिया प्राप्त की जा सके। उच्चतम न्यायालय ने बच्चों के स्कूल बैग और शिक्षण विधियों के वजन को लेकर एक विशिष्ट निर्णय दिया है, लेकिन त्रिपुरा के कई निजी स्कूल न्यायालय के निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसका प्रभाव छात्रों पर पड़ रहा है। घोष ने कहा, हम हर निजी और सरकारी स्कूल से संपर्क कर रहे हैं, ताकि शीर्ष अदालत के निर्देश का यथाशीघ्र पालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शौचालय की सुविधा, सुरक्षित पेयजल और अन्य सुविधाओं के प्रावधान तथा छात्रों के आराम की सुविधा का भी ऑडिट किया जाएगा।