त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब (Biplab Deb) ने बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्री टीपू मुंशी की उपस्थिति में त्रिपुरा के धलाई जिले के कमालपुर में तीसरे भारत-बांग्लादेश सीमा हाट की नींव रखी। सिपाहीजाला जिले के कमलासागर और दक्षिण त्रिपुरा जिले के श्रीनगर में पहले से ही दो कार्यात्मक व्यापार बिंदु स्थित हैं। देब ने यह भी बताया कि त्रिपुरा में कुल आठ सीमा हाट स्थापित करने के प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने इस अवसर पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना (PM Sheikh Hasina) को त्रिपुरा में इस तरह के व्यापार बिंदु स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए धन्यवाद दिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हाट के निर्माण पर 5.2 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कमालपुर (भारत) - कुरमाघाट (बांग्लादेश) सीमा हाट 75 वर्ग मीटर के एक भूखंड में फैला हुआ है और प्रत्येक तरफ 100 विक्रेताओं को समायोजित कर सकता है।



सीएम बिप्लब देब ने कहा कि “यह शिलान्यास समारोह भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे सौहार्द को मजबूत करेगा। मैं पीएम मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना को इन परियोजनाओं को दिन के उजाले में लाने के उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देता हूं, ”।

उन्होंने कहा: "भारत और बांग्लादेश (Bangladesh) दोनों मजबूत सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों के साथ प्रगति कर रहे हैं। बंगलाबंधु शेख मजीबुर रहमान की विरासत को उनकी बेटी और बांग्लादेश के वर्तमान प्रधान मंत्री द्वारा सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है। ”
बिप्लब देब (Biplab Deb) ने कहा कि “हमने राज्य भर में कुल आठ ऐसे बॉर्डर हाट स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें से दो पूर्ण रूप से चल रहे हैं जबकि एक यहां कमालपुर में स्थापित किया जाएगा। उम्मीद है कि इस साल से यह हाट पूरी तरह से चालू हो जाएगा। हमें धर्मनगर (Dharmanagar) में एक और के लिए मंजूरी मिल गई है और जल्द ही हम इसे शुरू करने जा रहे हैं। ये सीमा हाट निश्चित रूप से देशों के बीच व्यापार संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे ”।
 
दूसरी ओर, बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्री टीपू मुंशी (Tipu Munshi) ने कहा, 'भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध अच्छे हैं और हम इसे बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। व्यापार संबंधों में सुधार के इन प्रयासों के साथ दोनों देश करीब आएंगे। इन व्यापार बिंदुओं से दोनों देशों को समान रूप से लाभ होगा।"