अगरतला। उत्तर त्रिपुरा के उनाकोटी जिले में मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव पर 'कुशासन' का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक डॉ. दिलीप दास का छोटा भाई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गया। 

तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुबल भौमिक ने भाजपा विधायक के छोटे भाई धीरज दास के पिछले चार साल से भाजपा से जुड़े रहने का दावा करते हुए कहा कि पार्टी को सत्ता में लाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत भी की थी, लेकिन मुख्यमंत्री की बदले की राजनीति और भाजपा-आईपीएफटी (इंडिजिनस पीपल फ्रंट ऑफ त्रिपुरा) सरकार की ङ्क्षहसा एवं भ्रष्टाचार से खफा होकर वह शनिवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। 

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भौमिक ने कहा, 'पश्चिम बंगाल के विकास, विशेष रूप से सामाजिक कल्याण योजनाओं और ममता बनर्जी सरकार द्वारा स्वास्थ्य और शिक्षा पर किए गए कार्यों से प्रभावित होकर धीरज दास कुमारघाट में बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ तृणमूल में शामिल हो गए। उनके भाजपा में शामिल होने के साथ ही भाजपा के सदस्यों में जल्दी ही भारी कमी आएगी जिस कारण वे निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जनसभा भी नहीं कर पाएंगे।'

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देव ने शनिवार को एक चाय बागान का दौरा किया और धलाई जिले के कमालपुर में एक रैली को संबोधित किया। जहां शिक्षा विभाग ने कॉलेज के छात्रों को मुख्यमंत्री के भाषण को सुनने के लिए 40 अंक प्रदान करने का लालच दिया। इसके बावजूद भी रैली बेअसर रही और देव ने जब अपना भाषण शुरू किया तो वहां मौजूद लोग सभा छोड़कर चले गए। 

भौमिक ने कहा, 'पिछले चार वर्षों में राज्य ने सोशल मीडिया और मीडिया पर भाजपा और उसके नेताओं के बड़े बड़े दावों के अलावा कोई विकास नहीं देखा है। पार्टी ने भ्रष्टाचार, नौकरशाही सरकार को संस्थागत रूप दिया है, अपराधियों और असामाजिक लोगों को प्रोत्साहित किया है, लोकतांत्रिक संस्थानों को ध्वस्त किया है और सरकारी खजाने को लूटा है।'

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उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। उन्होंने उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा मनरेगा में हुए कथित करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार की न्यायिक जांच की मांग की। क्योंकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं और कुछ कर्मचारियों की मिली भगत से 230 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया था। इस बीच भाजपा ने श्री भौमिक के दावे का खंडन किया और कहा, 'धीरज दास कभी भाजपा के साथ नहीं रहे थे।

भाजपा के सत्ता में आने के बाद भी उन्हें कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता था। अब, जो कोई भी तृणमूल कांग्रेस में शामिल होता है, वह या तो कांग्रेस या अन्य पार्टियों से होता है, लेकिन भाजपा से नहीं। इसलिए हमें ऐसे लोगों की चिंता नहीं है। दूसरी ओर भाजपा ने दावा किया कि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में 2500 से अधिक मतदाता जिनमें से ज्यादातर आदिवासी क्षेत्रों, अन्य दलों से पिछले तीन सप्ताह में पार्टी में शामिल हुए है।