त्रिपुरा की भाजपा सरकार को इस सप्ताह अगरतला हाई कोर्ट ने एक एनआरआई के प्रवेश को रोकने के उद्देश्य से जारी एक लुकआउट सर्कुलर को खत्म कर झटका दे दिया है। बैंक ऑफ अमेरिका में बतौर वाइस प्रेसीडेंट काम करने वाले सौमेन सरकार, त्रिपुरा इन्फोवे न्यूज पोर्टल चलाते हैं, जो उनके गृह राज्य पर केंद्रित है। सरकार का कहना है कि जैसा कि उन्होंने अपने समाचार पोर्टल में निडर रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित किया है। इसने उन्हें पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ माकपा और फिर भाजपा सरकार द्वारा परेशानी में डाल दिया। उनके पोर्टल के खिलाफ माकपा के राज्य सचिव गौतम दास और वर्तमान मुख्यमंत्री बिप्लब देब, दोनों खेमों और अन्य नेताओं पर मानहानि का ममाला दायर किया।

राज्य सरकार ने 18 जनवरी, 2020 को दायर किया और अंतत: सरकार के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर हासिल किया, जो समय-समय पर अगरतला में अपने माता-पिता और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं। सरकार ने तुरंत लुकआउट सर्कुलर को अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि यह उन्हें अगरतला में अपने माता-पिता और रिश्तेदारों से मिलने से रोकने की साजिश है। सरकार ने कहा,‘मैंने मनी लॉन्ड्रिंग या हत्या जैसा कोई गंभीर अपराध नहीं किया है, इसलिए लुकआउट सर्कुलर स्पष्ट रूप से प्रेरित था और मैं भारतीय वकीलों की मदद से केस लड़ रहा हूं क्योंकि मुझे भारतीय न्याय पर पूरा भरोसा है।’ अगरतला हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुबाशीस तालापात्रा ने अब लुकआउट सर्कुलर को खारिज कर दिया है।

न्यायमूर्ति तालपात्रा ने अपने फैसले, जो कि आईएएनएस के पास उपलब्ध है, में कहा,‘वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी का कोई वारंट लंबित नहीं है और याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व उसके वकील द्वारा किया जा रहा है। सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत नोटिस ऐसे समय में जारी किया गया था, जब याचिकाकर्ता के लिए कोविड-19 लॉकडाउन के चलते भारत की यात्रा करना असंभव था।’ उन्होंने कहा कि इसलिए, पुलिस के सामने पेश नहीं हो पाने को उसके द्वारा जानबूझकर ऐसा करना नहीं कहा जा सकता है। जहां तक पासपोर्ट को जब्त करने का सवाल है, रिस्पॉन्डेंट नंबर 1 और 2 (त्रिपुरा सरकार, डीजीपी और एसपी-पश्चिम त्रिपुरा जिला) द्वारा पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10 (3) के संदर्भ में कोई मामला नहीं बनाया गया है। इसके अलावा, पासपोर्ट अधिनियम भारतीय पासपोर्ट प्राधिकरण को अमेरिकी पासपोर्ट को रद्द करने के लिए अधिकृत नहीं करता है।

उन्होंने कहा कि यह अदालत याचिकाकर्ता के अधिकार के प्रति आंखें बंद नहीं कर सकती हैं। यह निर्णय भाजपा शासित राज्य सरकार और त्रिपुरा की अग्रणी विपक्षी पार्टी, माकपा दोनों के लिए ही झटका है, जिसने (माकपा) तीन साल पहले सत्ता से बेदखल होने तक दो दशकों तक राज्य पर शासन किया था। फैसले से खुश सरकार ने न्यूयॉर्क से कहा कि भारतीय न्याय प्रणाली में उनका विश्वास पूरी तरह से कायम हो चुका है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि सरकार के खिलाफ मानहानि के मामले अभी भी हैं और केवल लुकआउट सर्कुलर को खारिज कर दिया गया है।