अगरतला। त्रिपुरा की बिप्लब सरकार (Biplab government of Tripura) ने ​विरोधियों को झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट (SC) में त्रिपुरा हिंसा (Tripura Violence) की जांच SIT को सौंपने की याचिका को भारी जुर्माने के साथ खारिज करने की मांग की है। साथ ही बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर याचिकाकर्ता की चुप्पी पर सवाल उठाया है। त्रिपुरा सरकार (Tripura Government) ने SC में जनहित याचिका पर पलटवार किया है, जिसमें अक्टूबर 2021 की त्रिपुरा सांप्रदायिक हिंसा (Tripura Communal Violence) पर स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। 

साथ ही त्रिपुरा की बीजेपी सरकार (Tripura BJP Government) ने राज्य में पूर्व नियोजित और नियोजित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जनहित याचिका दायर करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया है। त्रिपुरा सरकार ने एससी (SC) में दाखिल हलफनामे में याचिकाकर्ता पर "चुनिंदा जनहित", "चुनिंदा आक्रोश"  का आरोप लगाया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अदालत ने बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा (violence in Bengal) के खिलाफ याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था और इसे वापस हाईकोर्ट भेज दिया था। इस मामले में याचिकाकर्ता ने " पब्लिकली स्प्रिटिड" होने का दावा कर त्रिपुरा जैसे छोटे राज्य में कुछ उदाहरणों का मुद्दा उठाया, लेकिन बंगाल में चुनाव पूर्व और चुनाव के बाद की हिंसा की बहुत गंभीर और व्यापक घटनाओं पर चुप थे।

त्रिपुरा सरकार (Tripura Government) ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं की तथाकथित "पब्लिक स्प्रिट” कुछ महीने पहले बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा (sectarian violence) में नहीं आई, अचानक त्रिपुरा जैसे छोटे राज्य में कुछ उदाहरणों के कारण वो जाग गई। एक सच्चा और नेकदिल जन-उत्साही नागरिक अपने जनहित में चयनात्मक नहीं होगा। एक राज्य के संबंध में इस माननीय न्यायालय के समक्ष जल्दबाजी करने और दूसरे के संबंध में चुप रहने की बात नहीं सोंचेगा।

बता दें कि त्रिपुरा सरकार (tripura Government) ने रिपोर्ट को "घटनाओं का एकतरफा अतिरंजित और विकृत बयान" कहा है। त्रिपुरा सरकार का कहना है कि पहले से दर्ज मामले जिनमें त्रिपुरा हिंसा के दोषियों के खिलाफ गिरफ्तारी हुई है, पाकिस्तान (Pakistani ISI) के ISI के साथ संबंधों की भी जांच की जा रही है। गौर हो कि 28 नवंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और त्रिपुरा सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा था।

जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने कहा था कि इस मामले में राज्य सरकार की ओर से कदम उठाए नहीं जा रहे हैं। याचिकाकर्ता वकील एहतेशाम हाशमी (Advocate Ehtesham Hashmi) ने याचिका दाखिल कर त्रिपुरा में मुस्लिमों पर हमले की SIT स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हाशमी त्रिपुरा हिंसा के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (fact finding committee) में थे जिन पर पुलिस ने यूएपीए के तहत मामला भी दर्ज किया था।