त्रिपुरा की सरकार ने चराई जनजाति के उन 640 सदस्यों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की है जो मिजोरम के विस्थापित ब्रू समुदाय के सदस्यों के साथ झड़प के बाद पड़ोसी राज्य असम भाग गए थे। उत्तर त्रिपुरा जिले में 26 जुलाई को कास्को ब्रू शिविर के निकट स्थानीय जनजातीय लोगों और ब्रू लोगों के बीच झड़प होने से 13 लोग घायल हो गए थे।

इस घटना के बाद 640 चराई लोग असम के करीमगंज जिले के पाथरकांडी के मानिकबान कस्बे में चले गए थे। उत्तर त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक भानुपाड़ा चक्रवर्ती ने बताया कि पानीसागर के विधायक बिनॉय भूषण दास अधिकारियों के साथ शनिवार को मानिकबान गए जहां उन्होंने चराई लोगों को वापस लौटने के लिए राजी करने का प्रयास किया।

चक्रवर्ती ने बताया कि झड़प दरअसल तब हुई जब कुछ ब्रू लोगों ने दामचेरा खंड में सड़क किनारे दुकान खोली जिस पर स्थानीय चराई लोगों और हलम जनजाति के लोगों ने आपत्ति जताई।

दुकानदारों ने दुकानें बंद करने से इनकार किया तो झड़प शुरू हो गई। इसमें 13 लोग घायल हो गए। उन्होंने बताया कि कुछ चराई लोग असम के मानिकबान भाग गए थे। शुक्रवार को उन्हें भोजन सामग्री और चिकित्सा सहायता भेजी गई और आज स्थानीय विधायक उन्हें वापस लाने के लिए गए। उम्मीद है कि वे जल्द ही घर लौट आएंगे।’’

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि राज्य एवं केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को इलाके में तैनात किया गया है और हालात पूरी तरह से शांतिपूर्ण हैं। मिजोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपल्स फोरम के सचिव ब्रुनो म्शा ने भी चराई लोगों से घरों को लौटने की अपील की।

वहीं दूसरी ओर असम-मिजोरम में सीमा विवाद के बीच दोनों राज्‍यों में लगातार तनाव बना हुआ है। वहीं मिजोरम की पुलिस ने असम के मुख्‍यमंत्री हिमंत बिस्‍वा सरमा के खिलाफ शुक्रवार को केस दर्ज किया है। जिसपर हिमंत बिस्‍वा सरमा ने कहा क‍ि जांच में शामिल होकर उन्‍हें खुशी होगी।

असम के मुख्‍यमंत्री ने शनिवार को ट्वीट किया, ‘किसी भी जांच में शामिल होने में मुझे बहुत खुशी होगी। लेकिन यह केस किसी तटस्थ एजेंसी को क्यों नहीं सौपा गया, खासकर जब यह घटना असम के वैधानिक क्षेत्र के अंदर हुई है। इस बात तो जोरमाथांगा जी (मिजोरम सीएम) तक पहले ही पहुंचा चुका हूं।’