बांस के अधिक उपयोग और उससे मुनाफे के लिए जिले में अब आसाम और त्रिपुरा में पाए जाने वाले बांस के पौधे तैयार किए जाएंगे। इसके लिए कवायद भी शुरु हो गई। छपारा से करीब पांच किमी  दूर खैरी गांव के पास जिले की पहली हाईटेक नर्सरी बनाई जा रही है। यहां पर हर साल करीब  दो लाख बांस के पौधे तैयार होंगे।राष्ट्रीय बैंबू मिशन के तहत राज्य बैंबू मिशन इस काम को कर रहा है। प्रदेश में चार नर्सरियां तैयार हो रही हैं जिसमें से एक सिवनी में बन रही है। वर्तमान में सामाजिक वानिकी की नर्सरियों से करीब 4 लाख पौधे तैयार होते हैं।

जानकारी के अनुसार खैरी गांव में वन विभाग की खाली पड़ी जमीन में दो हेक्टेयर नर्सरी तैयार हो रही है। यहां पर आवागमन की सुविधा है साथ ही वैनगंगा नदी से पर्याप्त पानी भी मिल सकेगा। चूंकि यहां पर पहले से ही एक सामाजिक  वानिकी विभाग की एक बड़ी नर्सरी संचालित है।  50 लाख की लागत के इस प्रोजेक्ट में अलग-अलग बैड, ग्रीन हाऊस शेड के अलावा अन्य निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।

नर्सरी में बांस के पौधे तैयार करने के लिए पहले बाहर राज्यों के राइजोम लाए जाएंगे। आसाम और त्रिपुरा राज्यों के टूंडला, बालकोआ और कटंग बास काफी बेहतर माने जाते हैं। राइजोम मिलने पर बेड ओर ग्रीन हाऊस में  पौधे तैयार होंगे। बाद में ये पौधे आमजनों और किसानों को मिल सकेंगे। आमतौर पर नर्सरियों में 10 से 15 रुपए में बांस का एक पौधा मिलता है लेकिन यहां पर एक पौधा 30 रुपए में मिलेगा।

आमतौर पर नर्सरियों स्थानीय या देशी प्रजाति के बांस के पौधे तैयार होते हैं लेकिन हाईटेक नर्सरी में जो बांस के पौधे तैयार होंगे वे अलग किश्म के होंगे। इनसे तैयार होने वाला बांस मजबूत होगा साथ ही भिर्रा अच्छा होगा, बायोमास मैकिनिकल और अधिक इप्रूव होगा। देसी बांस की उम्र करीब 40 साल तक टिकता है लेकिन यह बांस 60 से 70 साल तक टिकेगा।ये बांस भी भुरभुरी मिट्टी में आसानी से तैयार हो जाएंगे।