त्रिपुरा सरकार ने पूरे राज्य में बोतलबंद पेयजल इकाइयों के खिलाफ उत्पादों के निर्धारित मानक का उल्लंघन करने के लिए एक बड़ी कार्रवाई शुरू की है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन ने अगरतला और इसके आसपास के इलाकों में कम से कम आठ पेयजल निर्माण और पैकेजिंग इकाइयों और अन्य जिलों में पांच इकाइयों को निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए बंद कर दिया है। 

ये भी पढ़ेंः त्रिपुराः लोक निर्माण विभाग में इन पदों पर नौकरी पाने का सुनहरा मौका, चाहिए ये योग्यता


प्रिवेंटिव हेल्थ विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से अपने-अपने क्षेत्रों की पेयजल पैकेजिंग इकाइयों में छापेमारी करें और अगर किसी नियम का उल्लंघन मिलता है तो उस इकाई को तुरंत बंद कर दें। अधिकारियों ने कहा कि राज्य में 100 से ज्यादा पेयजल पैकेजिंग इकाइयां हैं जो पिछले कुछ वर्षों से त्रिपुरा में काम कर रही हैं और हर माह इसकी सूची लंबी होती जा रही है, लेकिन ऐसी कई इकाइयों के पास एफएसएसएआई लाइसेंस और बीआईएस प्रमाणन दोनों नहीं हैं और जिला प्रशासन इस पर उचित ध्यान नहीं दे रहा था। 

ये भी पढ़ेंः त्रिपुरा में एमबीबी हवाई अड्डे पर यात्रियों को मिलेगी ये खास सुविधा, शुरू होने वाला है विदेशी मुद्रा काउंटर


उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका की सुनवाई में निर्देश दिया था कि सभी जिलाधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में पेयजल पैकेजिंग इकाइयों पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें बाजार में बेचे जा रहे बोतलबंद पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल उठाया गया था। मुख्य न्यायाधीश टी अमरनाथ गौड़ और न्यायमूर्ति एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को पेयजल इकाइयों में पानी की गुणवत्ता का निरीक्षण करने और अगली सुनवाई से पहले इसकी एक रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। न्यायालय से प्राप्त निर्देश के बाद, मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को पेयजल इकाइयों का लाइसेंस, स्वच्छता, पानी की गुणवत्ता और तय मानक संबंधी रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए इकाइयों का निरीक्षण करने का आदेश दिया था।