बांदा। ईंट भट्ठे में बंधुवा मजदूरी कर रहे बांदा जिले के 40 मजदूरों को बंधुवा मुक्ति मोर्चा की दिल्ली यूनिट ने रेस्क्यू के जरिये रिहा करा लिया है। उन्हें बांदा भेजा जा रहा है।

बांदा जिले के बिसंडा, कठेलवा पुरवा, झंडू पुरवा आदि गांवों के इन मजदूर परिवारों को ठेकेदार ईंट भट्ठे में मजदूरी की बात कहकर करीब तीन माह पहले ले गया था। बंधुवा मुक्ति मोर्चा, नई दिल्ली के कार्यकर्ता सोनू तोमर ने बताया कि इन बाल मजदूरों को पश्चिमी त्रिपुरा के जिला खोवाई के मोहरछरा गांव में ईंट भट्ठे में रखा गया था।

बंधक बनाकर काम लिया जा रहा था। मुक्ति मोर्चा केंद्रीय कार्यालय को इसकी जानकारी हुई तो वहां के एडीएम सुशांत कुमार को जानकारी दी गई। एडीएम ने एसडीएम मोहम्मद शहजाद और जिला श्रम अधिकारी सुजीत लश्कर को कार्रवाई के आदेश दिए।

यह अधिकारी टीम के साथ मोहरछरा ईंट भट्ठा पहुंचे और मजदूरों से पूछताछ की। मजदूरों ने बताया कि उन्हें बंधक बनाकर काम लिया जा रहा है। उनकी हालत बहुत खराब थी। खाने-पीने के लाले थे। अधिकारियों ने इन सभी को रिहा कराकर बांदा के लिए रवाना कर दिया है। रिहा कराए गए मजदूरों में 20 बच्चे, 10 महिलाएं और 10 पुरुष हैं।

मुक्ति मोर्चा कार्यकर्ता सोनू तोमर ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मानव तस्करी और बंधुवा मजदूरी हो रही है। बंधुवा मजदूरों को मुक्त प्रमाण पत्र व पुनर्वास योजना के तहत प्रति मजदूर 20 हजार रुपये दिए जाना चाहिए।