कोरोना वायरस के ओमीक्रॉन संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच अब उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार की वर्चुअल तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि ये तैयारियां पिछले कई महीनों से जारी हैं। चुनाव आयोग के आदेश से पहले ही दूसरी लहर के दौरान भारतीय जनता पार्टी तीन से ज्यादा वर्चुअल रैलियां आयोजित कर चुकी है, वहीं अब आईटी सेल की जिम्मेदारियों को भी और बढ़ा दिया गया है। सोशल मीडिया का काम-काज सँभालने के लिए 6,500 लोगों की टीम लगाई गई है। 

भाजपा के 1918 मंडल पर लगभग 5,700 पदाधिकारी मौजूद हैं। हर मंडल का वाट्सऐप ग्रुप तैयार किया गया है। डिजिटल प्रचार सामग्री मुख्यालय से तैयार होगी। वहीं, जानकारी के मुताबिक पूरे प्रदेश में डिजिटल प्रचार के लिए 9 लाख LED स्क्रीन लगाई जाएंगी, जबकि 4 हाईटेक स्टूडियो बनकर तैयार हैं। इन्हीं डिजिटल स्टूडियोज में वर्चुअल रैलियों का आयोजन होगा। जहां 10-50 हज़ार लोग आसानी से जुड़ सकेंगे।

दूसरी तरफ रथ यात्रा में जबरदस्त भीड़ इकठ्ठा करने वाली समाजवादी पार्टी फिलहाल डिजिटल तैयारियों के दौर से गुजर रही है। हालांकि सपा सूत्रों की मानें तो "आ रहे हैं अखिलेश" नारे को बुलंद करने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए वाट्सऐप ग्रुप, फेसबुक पेज, Koo App अकाउंट और टि्वटर अकाउंट पर सक्रियता से काम किया जा रहा है। 

भाजपा की तरह समाजवादी पार्टी का डिजिटल विंग भी पहले से काम कर रहा है। वाट्सऐप ब्रॉडकास्ट और फेसबुक द्वारा बैठकों एवं कार्यक्रमों की जानकारी नेताओं और कार्यकर्ताओं को भेजी जा रही है। ट्विटर, फ़ेसबुक और Koo जैसे स्वदेशी माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर 100 से ज़्यादा वेरिफाइड अकाउंट तैयार हैं। विधानसभाओं के सोशल मीडिया सेल द्वारा गूगल मीट पर वर्चुअल मीटिंग्स का आयोजन भी जारी है।

वहीं, कांग्रेस की बात करें तो प्रियंका गांधी लगातार फ़ेसबुक के ज़रिए वोटरों से बातचीत कर रही हैं। “लड़की हूं लड़ सकती हूं” नारे के साथ प्रियंका महिला वोटरों को रिझाने की पुरजोर कोशिश में लगी हैं। इसके लिए लाइव कार्यक्रम के जरिये, यूपी के सभी ब्लॉक में LED स्क्रीन के साथ वोटरों से लाइव जुड़ने की तैयारी भी है। यूपी चुनावों के लिए कांग्रेस के 75,000 वाट्सऐप ग्रुप बनाए गए हैं। दिल्ली और लखनऊ में सोशल मीडिया का मुख्यालय बनाया गया है, जहां से सारी एक्टिविटीज पर पैनी नजर रखी जाएगी। 

हालांकि डिजिटल या धरातल, दोनों ही माध्यमों में चार बार की मुख्यमंत्री रहीं, मायावती की बहुजन समाज पार्टी कहीं अधिक पीछे छूटती नजर आ रही है। बसपा या खुद मायावती के सोशल मीडिया पेज पर उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस लाइव प्रसारित की जाती हैं, लेकिन किसी विशेष नारे से लेकर कोई भी बड़ा कैंपेन देखने को नहीं मिलता।

 

अब इन चुनावों में देसी भाषा में ऑनलाइन अभिव्यक्ति को सक्षम बनाने वाले मंच के रूप में Koo App से उत्तर प्रदेश में राजनेताओं, राजनीतिक दलों, सरकारी विभागों और प्रभावशाली शख्सियतों के जुड़ने का सिलसिला लगातार जारी है। उत्तर प्रदेश में तमाम राजनीतिक दलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 50 प्रतिशत विधायक और 41 सांसद Koo App पर मौजूद हैं।

 ये सभी राजनेता इलाके के विकास और इसके बारे में अपने विचार हिंदी में जाहिर करते हुए लोगों के साथ नियमित रूप से चर्चा में जुड़ रहे हैं। Koo पर चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान चुनावों-उम्मीदवारों आदि के बारे में खुलकर चर्चा हो रही है। यूजर्स को अपने संदेश को कई भाषाओं में भेजने और कई समुदायों से जुड़ने का अधिकार देने के मामले में भी Koo राजनेताओं की पहली पसंद बना हुआ है। लाइवस्ट्रीम जैसे अन्य स्मार्ट फीचर्स लाइव चर्चा और बहस का मौका पेश कर रहे हैं।