गणतंत्र दिवस परेड के लिए हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तराखंड की झांकियां भी विशेषज्ञ समिति की कसौटी पर खरी नहीं उतरी। पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ इत्यादि 16 राज्यों की झांकियां शामिल रहेंगी। वहीं इस परेड में राजधानी दिल्ली की झलक नहीं होगी। धर्मनिरपेक्ष सांस्कृतिक विरासत की थीम पर आधारित दिल्ली की झांकी का प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया गया है।


रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के पास गणतंत्र दिवस परेड के लिए इस बार कुल 56 झांकियों के प्रस्ताव आए थे। इनमें से 22 झांकियों के प्रस्तावों को स्वीकृत किया गया है। इनमें तीन केंद्रीय मंत्रलयों, तीन सरकारी विभागों और 16 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां शामिल की गई हैं।


आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मेघालय, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडू, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश इस बार परेड में शामिल होने का मौका मिला है।


इसी तरह से हरियाणा सरकार की ओर से राज्य की झांकी के पांच प्रस्ताव भेजे गए थे। मेरी फसल-मेरा ब्यौरा, मेरा परिवार-मेरी पहचान, मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना, अंत्योदय सरल केंद्र एवं महिला सुरक्षा-नारी शक्ति एप। लेकिन विशेषज्ञ समिति ने राज्य सरकार के प्रचार से जुड़े इन सभी प्रस्तावों को रद कर दिया। चंडीगढ़ की झांकी का प्रस्ताव जेलों की थीम पर था, वो भी समिति को पसंद नहीं आया। अलबत्ता, गुरु नानक देव के 550 वें प्रकाशोत्सव की थीम पर आधारित पंजाब की झांकी का प्रस्ताव समिति को भा गया।


जबकि कि दिल्ली सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने इस बार दिल्ली की धर्मनिरपेक्ष सांस्कृतिक विरासत पर झांकी तैयार करने का प्रस्ताव भेजा था। इसमें दर्शाया जाना था कि दिल्ली में सभी धर्म-संप्रदायों के लोग आपस में मिल-जुलकर रहते हैं और यहां सभी धर्मों के अनुयायियों के धार्मिक स्थल भी हैं। विशेषज्ञ समिति ने दिल्ली के इस इकलौते प्रस्ताव को चार राउंड तक विचाराधीन रखा, लेकिन उसके बाद अस्वीकृत कर दिया।


मालूम हो कि आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में दिल्ली की झांकी गणतंत्र दिवस परेड में दो बार शामिल हुई है। 2019 में महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष की थीम पर और इससे पहले दिल्ली के मॉडल स्कूलों पर आधारित झांकी को परेड में शामिल किया गया था।