लखीमपुर हिंसा मामले (Lakhimpur violence case) से जुड़ी दो जनहित याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की है।  ये सुनवाई सीजेआई एनवी रमणा (CJI NV Ramana) की अगुवाही वाली बेंच ने की।  याचिकाओं को दो वकीलों ने दायर किया है, जिसमें लखीमपुर खीरी की हिंसक घटना के दौरान हुई मैतों की समयबद्ध तरीके से सीबीआई जांच की मांग की गई है।  कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh government)  की तरफ से वकील हरीश साल्वे (Advocate Harish Salve) पेश हुए।  उन्होंने बताया कि मामले में सरकार की तरफ से स्थिति रिपोर्ट दी गई है। 

इसपर सीजेआई ने कहा कि आपकी रिपोर्ट में कुछ नहीं है।  हमने दस दिन दिए थे. सीजेआई ने कहा कि लैब रिपोर्ट भी नहीं आई है।  आरोपियों के सेलफोन कहां थे, इसपर रिपोर्ट, आशीष मिश्रा का सेलफोन कहां था।  इसके बाद साल्वे ने कहा कि हमने आशीष के सेलफोन का लोकेशन दिया है, स्थिति रिपोर्ट देखिए।  उनके ऐसा कहने के बाद सीजेआई की ओर से कहा गया कि अन्य आरोपियों के सेलफोन की लोकेशन कहां है, क्या आरोपी सेलफोन नहीं रखते. आप रिपोर्ट के पैरा 7 की बात कर रहे हैं।  उसमें कुछ नहीं है। 

 साल्वे ने कहा कि सीसीटीवी से हमने आरोपियों के मौजूद होने कि स्थिति स्पष्ट की है।  पुलिस जांच कर रही है और हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है. इसके बाद बेंच ने कहा कि एक ही साक्ष्य को आप दो जगह इस्तेमाल कर रहे हैं।  साल्वे ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने बयान दर्ज कर लिए हैं।  

साक्ष्यों की सामग्री को भी रिकॉर्ड में लिया गया है।  साल्वे ने कहा कि काफी लोग मौजूद थे और हम दोनों एफआईआर की अलग-अलग जांच कर रहे हैं।  कोई कोताही नहीं हो रही।  उन्होंने कहा कि कार से खींचकर लोगों को मारा गया, उसमें क्षेत्रीय लोग भी हैं और उस मामले में थोड़ी परेशानी आ रही है।  लेकिन हम सावधानी से कर रहे हैं। 

साल्वे ने कहा कि आरोपियों के सेलफोन की डिटेल्स का पता कर लिया गया है।  इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्दोष पत्रकार की मौत भी मामले में हुई है।  तो साल्वे ने कहा कि कार ने किसानों को रौंदा, उसी में पत्रकार की मौत हुई है।  आखिर में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया कि वह मामले की डे टू डे जांच की निगरानी के लिए राज्य से बाहर के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की नियुक्ति करेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने दो रिटायर्ड जज के नाम सुझाए हैं।  सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रंजीत सिंह और पूर्व जज जस्टिस राकेश कुमार का नाम सुझाया है।  मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को की जाएगी। 

 

सीजेआई ने उत्तर प्रदेश की ओर से पेश हुए वकील हरीश साल्वे से कहा कि मृतक श्याम सुंदर के मामले में हो रही जांच में लापरवाही पर क्या कहेंगे।  पीठ ने मृतक श्याम सुंदर की पत्नी के वकील से कहा कि सीबीआई को मामला सौंपना कोई हल नहीं है।  

हम अगली सुनवाई शुक्रवार को करेंगे।  सीजेआई ने कहा कि यूपी सरकार हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस से पूरे मामले की निगरानी कराने के सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर अपना जवाब दे।  कोर्ट ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जज से निगरानी कराई जानी चहिए, यही मामले का हल है. आप राज्य सरकार से पूछकर बताइए।