रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मजबूत कृषि परिदृश्य, संपर्क गहन सेवाओं की मांग बढ़ने और कोरोबार एवं उपभोक्ता धारणा में सुधार होने की बदौलत ग्रामीण एवं शहरी खपत में बढ़ोतरी होने की उम्मीद को ध्यान में रखते हुए चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 7.2 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 6.7 रहने का अनुमान जताया है। 

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रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैठक में लिए गये निर्णय की जानकारी देते हुये कहा कि विकास के दृष्टिकोण से उज्ज्वल कृषि संभावनाओं से ग्रामीण खपत में सुधार होने की उम्मीद है। संपर्क-गहन सेवाओं की मांग और व्यापार और उपभोक्ता भावना में सुधार से खर्च और शहरी खपत को बढ़ावा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सरकार के पूंजीगत व्यय में वृद्धि, बैंक ऋण में सुधार और क्षमता उपयोग में बढ़ोतरी से निवेश गतिविधि को समर्थन मिलने की उम्मीद है। 

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रिजर्व बैंक के औद्योगिक दृष्टिकोण सर्वेक्षण में मतदान करने वाली कंपनियों को वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही में उत्पादन आकार बढ़ोतरी होने और नए ऑर्डर की उम्मीद है, जिसके चौथी तिमाही तक बने रहने की संभावना है। लंबे समय से हालांकि जारी भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न उच्च जोखिम, वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय स्थितियों में मजबूती का आर्थिक विकास परि²श्य पर असर अभी भी जारी है। दास ने कहा कि इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2022-23 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास अनुमान 7.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी विकास अनुमान 16.2 प्रतिशत है। साथ ही दूसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.1 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.0 प्रतिशत पर रहने की उम्मीद है। इसी तरह वित्त वर्ष 2023-24 के लिए वास्तविक जीडीपी की वृद्धि 6.7 प्रतिशत अनुमानित है।