एक नाजी कमांडर की डायरी ने हाल ही में खजानों का राज खोल डाला है। इन खजानों में करीब 30 टन यानी 30 हजार किलोग्राम सोना, महंगी पेंटिंग्स, अमूल्य कलाकृतियां आदि शामिल हैं। कमांडर की डायरी के अनुसार ये खजाने 11 अलग-अलग जगहों पर रखे हुए हैं। इस खजाने की कीमत वर्तमान में 14 लाख करोड़़ रुपए है। ये खजाना विभिन्न किलों, गुफाओं, कुओं में छिपा बताया जा रहा है। गौरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर की नाजी सेना ने बहुत लूटपाट मचाई थी। अब एक नाजी कमांडर की डायरी से जर्मनी की सेना की ओर से लूटे गए खजानों का पता चला है।

डायरी के अनुसार 75 साल पहले नाजी कमांडर हेनरिच हिमलर ने ये खजाना 11 अलग-अलग जगह छिपाया था। मीडिया रिपोट्र्स का दावा है कि इनमें से एक जगह 16वीं सदी में बनाया गया पोलैंड का रोजटोका पैलेस है। इस पैलेस में 200 फीट गहरा एक कुआं है, जिसमें खजाना होने की बात लिखी गई है। डायरी में लिखा है कि ये सोना पोलैंड के एक कस्बे ब्रेसलाउ जिसे अब रोक्लॉ कहा जाता है से लाया गया था।

इस डायरी को काफी छिपा कर रखा गया था। इसे जर्मनी के क्वेडलिनबर्ग कस्बे में छिपाया गया था। एक मैसोनिक लॉज के प्रबंधन को इसे छिपाकर रखने की जिम्मेदारी दी गई थी। साल 2019 में यह डायरी पोलिश फाउंडेशन सिलेसियान ब्रिज को दी। सिलेसियान ब्रिज के प्रतिनिधि रोमन फर्मानिक ने पिछले साल मार्च में घोषणा की थी कि उसे अपने जर्मन पार्टनर से युद्ध की माफी के तौर पर एक डायरी मिली है, जिसमें कई खजानों का जिक्र है। इसमें उस जगह का नक्शा भी है, जहां रोजटोका पैलेस में सोना छिपाया गया है। बताया जाता है कि जर्मनी की सेना ने यहूदियों, संग्रहालयों और निजी कलक्टर्स से करीब 50 लाख यूरोपियन आर्टवर्क लूटे थे। अब ये अलग-अलग जगहों पर समय-समय पर मिलते रहते है। हालांकि अभी भी पोलिश यहूदियों के 63 हजार आर्टवर्क लापता हैं।