मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्र सरकार द्वारा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को प्रतिबंधित किए जाने पर आज कहा कि अगर सबूत हैं तो हर संगठन पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पीएफआई अगर पहले से आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहा तो केंद्र सरकार इतने समय से क्या कर रही थी। 

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कमलनाथ ने यहां संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि यदि कोई सबूत है कि वह आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं, आतंकवादी संस्थाओं से जुड़े हैं, तब पीएफआई हो या कोई भी संगठन हो, उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होना चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि आम जनता को सुरक्षा चाहिए और यदि इतने वर्षों से पीएफआई की गतिविधियां चल रही थी तो यह केंद्र सरकार की विफलता है, सरकार इतने सालों से क्या कर रही थी। पीएफआई आज पैदा नहीं हुआ है, उसका पंजीयन कब से हुआ है। यदि यह पहले से ही आतंकवादी संस्थाओं से जुड़ा संगठन था तो केंद्र सरकार इतने वर्षों से क्या कर रही थी। 

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वहीं पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके सभी सहयोगियों पर प्रतिबंध का स्वागत करते हुए तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रमुख ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मजबूत सरकार ही इस तरह की निर्णायक कार्रवाई कर सकती है। पार्टी ने एक बयान में कहा कि गैर-भाजपा राज्य सरकारें वर्षों से अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की अपनी राजनीतिक मजबूरी से प्रेरित थीं, जिससे पीएफआई जैसे खतरनाक संगठन राष्ट्रीय स्तर पर विकसित हुए। केंद्र सरकार ने मंगलवार को पीएफआई और उसके मोर्चों को पांच साल की अवधि के लिए तत्काल प्रभाव से गैरकानूनी संघ घोषित कर दिया।