नई दिल्ली। भारत में एक ऐसा भी वैज्ञानिक हुआ है जो रूस और चीन के साथ ही परमाणु बनाने जा रहा था. उसका कहना था कि सरकार से परमिशन मिलने के बाद सिर्फ 18 महीनों में वो परमाणु बम बना देगा. लेकिन अचानक से इस वैज्ञानिक की मौत हो गई जिसको हत्या करार दिया जाता रहा है. यह महान वैज्ञानिक कोई और नहीं बल्कि भारत के परमाणु प्रोग्राम के जनक वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा थे। दुर्भाग्यवश 24 जनवरी, 1966 को प्लेन क्रैश में उनकी मृत्यु हो गई. अपने निधन से 3 महीने पहले ही होमी भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि यदि उन्हें हर तरफ से मंजूरी मिल जाए तो भारत सिर्फ 18 महीनों में परमाणु बम बना सकता है.

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अमेरिका जाते समय हुई मौत

होमी भाभा हादसे से पहले एयर इंडिया की फ्लाइट 101 में सवार होकर मुंबई से न्यूयॉर्क जा रहे थे. इस यात्रा के दौरान उनकी फ्लाइट यूरोप की सबसे ऊंची पहाड़ी मोंट ब्लांक से टकराकर क्रैश हो गई. इस क्रैश में सभी 117 लोगों की मृत्यु हो गई, जिनमें होमी भाभा भी एक थे. हालांकि, इस सघटना के बाद प्लेन क्रैश की वजह विमान के पायलटों और जिनेवा एयरपोर्ट के बीच मिसकम्युनिकेशन बताया गया. लेकिन, इस प्लेन क्रैश में भाभा की मौत को लेकर कई ऐसे खुलासे किए गए जिनके बारे में जानकर पूरा देश चौंक गया.

सीआईए की साजिश

2008 में छपी एक किताब में बताया गया है कि भाभा के प्लेन क्रैश को अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए की साजिश थी. हालांकि, यह कभी साबित नहीं हो पाया. परंतु इन आरोपों के बाद से होमी भाभा की मौत का रहस्य और ज्यादा गहरा हो गया.

प्लेन क्रैश की साजिश में अमेरिका का हाथ 

आपको बता दें कि भारतीय महान वैज्ञानिक भाभा की मौत के पीछे अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए का हाथ होने को लेकर खूब चर्चा होती रही है. यह भी कहा गया कि सीआईए ने भाभा की मौत की साजिश इसलिए रची थी क्योंकि अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत के पास परमाणु शक्ति आ जाए. दरअसल, 2008 में विदेशी पत्रकार ग्रेगरी डगलस की एक किताब 'Conversation With the Crow' में उनकी और एक सीआईए अफसर रॉबर्ट क्राउली की बातचीत का अंश डाला गया. इसी में डगलस ने भारत के वैज्ञानिक होमी भाभा की मौत के पीछे अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए की साजिश होने की बात कही थी. 

ये थी थ्योरी

इस कारण के पीछे थ्योरी दी गई थी कि अमेरिका भारत जैसे देशों से चिंतित था. क्योंकि ये देश परमाणु हथियार हासिल करने की भरपूर कोशिश कर रहे थे. आपको बता दें कि 1945 तक सिर्फ अमेरिका के पास ही परमाणु शक्ति थी. लेकिन, इस मामले में अमेरिका की बादशाहत ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई और 1964 तक सोवियत यूनियन और चीन ने भी परमाणु बम का परीक्षण कर था.

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भारत को परमाणु शक्ति बनाना चाहते थे भाभा

आपको बता दें कि परमाणु जनक के नाम से मशहूर होमी भाभा एक जाने-माने न्यूक्लियर फिजिसिस्ट थे. उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी. यहीं से उन्हें अपने काम को लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली. भाभा ने उस कैवेंडिश लाइब्रेरी में भी काम किया था, जहां कई सारी बड़ी खोज की जा चुकी है. इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था तो होमी जहांगीर भाभा भारत आए हुए थे. भारत से उन्हें इतना लगाव हुआ कि यहीं रह गए. भारत में होमी भाभा ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस में सीवी रमन की लैब में काम करना शुरू कर दिया. जिसके बाद उन्हें मुंबई में टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के फाउंडर और डायरेक्टर बनाया गया.