मणिपुर को 1972 में राज्य का दर्जा मिला था लेकिन राजनीतिक उथल-पुथल के कारण इस छोटे से राज्य में 18 बार सरकारें बदलीं। ऐसी परिस्थितियों में केवल 20 विधायकों को साथ लेकर 2002 में इबोबी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और इस तरह वे 15 सालों से लगातार शासन करने वाले नेता बन गए। इबोबी एेसे नेता हे जो शुरू से ही कम बोलते हैं। उनका कम बोलना विवादों में घिरे रहने का तरीका भी रहा है। लेकिन राजनीति में आने वाले संकट को समझने का इबोबी को तजुर्बा कमाल का है। इबोबी को यह पता होता है कि किस मुद्दे को कैसे हैंडल करना है।


मणिपुर में 121 दिन तक आर्थिक नाकेबंदी का रिकार्ड रहा है लेकिन फिर भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई आंच नहीं आर्इ। राज्य में इतने सारे उथल पुथल के बाद भी इबोबी एेसे मुख्यमंत्री रहे है जिन्होंने 15 साल तक लगातार शासन किया। 19 जून, 1948 को थउबल जिले के अथोक्पम इलाके में जन्मे इबोबी सिंह को राजनीति में काफी भाग्यशाली कहा जाता है। इबोबी के जन्मदिन के मौके पर आज हम आपको इनके बारे में कुछ एेसी बातें बताने जा रहें है जो शायद ही आपको पता हाे।


कम बोलने की वजह से रहे विवादों में

इबोबी की पत्नी लानधोनी देवी है। जो दो बार खंगाबोक विधानसभा क्षेत्र से  विधायक रह चुकी हैं। वह थउबल जिले से पहली महिला विधायक थी। इबोबी एेसे नेताआें में है जो जन सभाआें आैर रैलियों में लंबा भाषण नहीं देते है। राज्य में उनकी राजनीतिक हैसियत के सामने अबतक दूसरा कोई नेता खड़ा नहीं हो सका है। उनकी राजनीतिक हैसियत के सामने अबतक दूसरा कोई नेता खड़ा नही हो सका है।


राजनीतिक उथल पुथल के कारण भी बने रहे सत्ता में

मणिपुर एेसा राज्य है जहां की पार्टियों में काफी टकराव था, लेकिन इसके बावजूद इबोबी की सरकार टिकी रही आैर उन्होंने लगातार 15 सालों तक शासन किया।मणिपुर में उग्रवाद, फर्जी मुठभेड़ समेत आर्थिक नाकेबंदी, आम हड़ताल, विवादित आफ्स्पा कानून, पहाड़ी और वैली की जनजातियों के बीच टकराव जैसे कई मुद्दे है जो प्रत्येक बार चुनाव में उठाए जाते है लेकिन इन सबसे इबोबी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।

1984 में निर्दलीय विधायक के रूप में शुरू किया करियर

इबोबी ने ग्रेजुएशन इंफाल के डीएम कॉलेज से की। इबोबी ने 1984 में एक निर्दलीय विधायक के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। साल 1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सीट पर जीतकर आए इबोबी को आरके दोरेंद्रो की सरकार में पहली बार मंत्री बनने का मौका मिला। खंगाबोक विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने के कुछ समय बाद इबोबी कांग्रेस में शामिल हो गए।

एेसे खुला मुख्यमंत्री बनने का रास्ता

अपनी विनम्रता से इबोबी ने दिल्ली में गांधी परिवार का भरोसा जीता और उसके सहारे प्रदेश की राजनीति में आगे बढ़ते चले गए। कांग्रेस ने 1995 में इबोबी को मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष बनाया तो उन्होंने पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई और महज तीन साल के भीतर सभी वरिष्ठ नेताओं को पीछे छोड़ते हुए प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी हासिल कर ली। इस तरह से इबोबी के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता खुल गया। मुख्यमंत्री इबोबी सिंह बहुसंख्यक मैती समुदाय से है जो अनुसूचित जनजाति में शामिल नहीं है।