वैज्ञानिकों को नागालैंड और मणिपुर में जीनस मेग्राफ्रीस या सींग वाले एशियाई मेंढकों की एक नहीं, बल्कि तीन नई प्रजातियां मिली हैं। सींग वाले मेंढकों की दो नई प्रजातियां नागालैंड में और एक प्रजाति मणिपुर के तमेंगलोंग जिले से मिली है। एशियाई सींग वाले मेंढक दक्षिण-पूर्व एशिया, भारत के उत्तर-पूर्व क्षेत्र के साथ-साथ नेपाल और भूटान में पाए जाते हैं। मेगाफ्रीज सींग वाले मेंढक मेगोफ्रीडा मेंढकों के परिवार से आते हैं। इस प्रजाति के मेंढकों की ऊपरी भौंहे आमतौर पर लंबी होती हैं, इसलिए उन्हें एशियाई सींग वाले मेंढक के रूप में जाना जाता है।

सींग वाले मेंढकों की तीन नई प्रजातियों की खोज आयरिश और भारतीय जीवविज्ञानी की एक टीम ने की थी, उनके इस खोज को 28 अप्रैल को जर्नल ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में प्रकाशित किया गया था। मेंढकों की जिन तीन नई प्रजातियों की खोज की गई है, उन्हें पहले विज्ञान में नहीं जाना जाता था। इन्हें मेगोफ्रीस अवुह यानी नागा हिल्स हॉर्न्ड फ्रॉग, मेगोफ्रीस नुम्बुमांग यानी तमेंगलोंग हॉर्न्ड फ्रॉग और मेगोफ्रीज डेजुक यानी डिजुको वैली हॉर्न्ड फ्रॉग नाम दिया गया है।

सींग वाले मेंढक की पहली प्रजाति मेगोफ्रीस अवुह को मेलुरी में पाया गया, जिसका संबंध पोखरी जनजाति से है और इस जनजाति की भाषा में आवु का अर्थ मेंढक होता है। दूसरे मेंढक नुम्बुमांग का नाम रोंगमेई और रुआंगमेई शब्द से लिया गया था, जिसका मतलब है जंगल की आत्मा। रोंगमेई मणिपुर के तामेंगलोंग जिले की प्राथमिक मूल जनजाति है। तीसरी प्रजाति को एकमात्र स्थान के बाद नामित किया गया था जो इस संभावित नई प्रजाति में पाया गया था। यह प्रजाति नागालैंड और मणिपुर राज्यों की सीमा पर पाई जाती है।

गौरतलब है कि सींग वाले मेंढकों की इन तीन नई प्रजातियों की खोज तब की गई थी, जब जीवविज्ञानी उत्तर-पूर्वी भारत के सींग वाले मेंढकों की छोटी प्रजातियों के एक समूह की जांच कर रहे थे। हालांकि इससे पहले भी बायोडाइवर्सिटी से भरपूर उत्तर-पूर्वी भारत में मेंढकों, सांपों, मछलियों और यहां तक कि चमगादड़ों की कई नई प्रजातियों की खोज की जा चुकी है।