मेघालय के राज्‍यपाल तथागत राय के बाद मेघालय हाई कोर्ट के जज ने भी कुछ ऐसी ही टिप्‍पणी की है, जिस पर विवाद बढ़ गया है। हाई कोर्ट के जज सुदीप रंजन सेन ने भारत को 'हिन्‍दू राष्‍ट्र' बनाने की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह भी सुनिश्चित करने की अपील की कि देश कहीं 'इस्‍लामिक' न बन जाए। उन्‍होंने यह टिप्‍पणी सोमवार (10 दिसंबर) को एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिस पर अब सियासत शुरू हो गई है। बीजेपी के फायरब्रांड नेता माने जाने वाले और केंद्रीय मंत्री गिर‍िराज सिंह ने जहां मेघालय हाई कोर्ट के जज की टिप्‍पणी का समर्थन किया है, वहीं जम्‍मू एवं कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमत्री व नेशल कांफ्रेंस के अध्‍यक्ष फारूक अब्‍दुल्‍ला और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्‍तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने जज की टिप्‍पणी भी हैरानी जताई है।

हैरान करने वाली है जज की टिप्पणी
मेघालय हाईकोर्ट के जज की यह टिप्‍पणी इसलिए भी हैरान करती है, क्‍योंकि आम तौर पर जजों को इस तरह के बयान देने की अनुमति नहीं होती। लेकिन इन सबसे बेपरवाह जज सेन ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह के कानून बनाए जाने चाहिए कि पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान से भारत आने वाले हिन्‍दू, सिख, जैन, बौद्ध, खासी और गारो समुदाय के लोगों को भारत में रहने की अनुमति मिल सके। उन्‍होंने यह भी कहा कि इन देशों में रहने वाले उक्‍त समुदाय के लोगों का मूल भारत से ही है और इसलिए उन्‍हें यहां की नागरिकता देनी चाहिए।

मोदी सरकार ही उठा सकती है एेसा कदम
उन्‍होंने साफ कहा कि किसी को भी भारत को इस्‍लामिक देश के रूप में बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, वरना यह भारत ही नहीं, दुनिया के लिए भी 'कयामत का दिन' होगा। उन्‍होंने कहा, 'मुझे लगता है कि केवल नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ही इसकी गंभीरता को समझ सकती है और इसके लिए जरूरी कदम उठा सकती है।'





अपने विचार व्यक्त करने की आजादी लेकिन इससे कुछ नहीं होगा
मेघालय हाई कोर्ट के जज की इस टिप्‍पणी को जहां गिर‍िराज सिंह ने सही ठहराया है, वहीं फारूक अब्‍दुल्‍ला ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा। उन्‍होंने यह भी कहा कि चूंकि यह लोकतांत्रिक देश है, इसलिए किसी को भी अपना विचार व्‍यक्‍त करने की आजादी है, पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।





एेसे व्यक्ति को इतने जिम्मेदार प पर कैसे नियुक्त किया गया
जज की इस टिप्‍पणी पर ओवैसी ने भी प्रतिक्रिया व्यक्‍त की है। उन्‍होंने कॉलेजियम पर भी सवाल उठाया और कहा कि आखिर ऐसे व्‍यक्ति की नियुक्ति इतने ज‍िम्‍मेदार पद पर कैसे की गई। उन्‍होंने यह भी कहा कि जज को यह जानना चाहिए कि संविधान की मौलिक संरचना धर्मनिरपेक्षता है।