नई दिल्ली। इस समय पूरे भारत में मध्यप्रदेश स्थित बागेश्वर धाम और वहां के चमत्कारी बाबा धीरेंद्र शास्त्री की ही चर्चा हो रही है. संपूर्ण मीडिया में यही नाम घूम रहा है और बाबा के वीडियो जबरदस्त रूप से वायरल हो रहे हैं. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोग बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री और उनके चमत्कारों के बारे में जानना चाह रहे हैं. इसी कड़ी में हम आपको बता रहे हैं कि बागेश्वर धाम कैसा है, यहां क्या होता है और आखिर कैसे पुरोहित से धीरेंद्र शास्त्री इतने चमत्कारी बाबा बन गए. तो जानिए...

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ये है बागेश्वर धाम का रास्ता

मध्यप्रदेश के छतरपुर से खजुराहो की ओर जाने वाले हाईवे रास्ते पर करीब 15 किमीचलने पर ही बाएं हाथ पर एक रास्ता जाता है. यह रास्ता गढा गांव की ओर जाता है. यहीं चौराहे पर ई रिक्शा और टेंपों खड़े रहते हैं जो 10 से 20 रुपये में बागेश्वर धाम तक पहुंचा देते हैं.

यहां पर स्थित है बागेश्वर धाम

आपको बता दें कि बागेश्वर धाम गढा गांव में ही स्थित है. गढा गांव के दूसरे छोर पर एक छोटी सी पहाड़ी है और यहीं पर स्थित हैं बागेश्वर धाम. पहाड़ी पर चढ़ने के बाद आपको दो छोटे छोटे मंदिर नजर आएंगे. इनमें से एक है भगवान बागेश्वर महाराज यानी शंकर जी की छोटी सी मढिया. ये इतनी छोटी है कि शिवलिंग को स्पर्श करना हो तो झुककर भी एक आदमी मुश्किल से जा पाए. इसी गांव में लाखों की संख्या में श्रद्धालु ठहरे हुए रहते हैं.

ऐसे पड़ा बागेश्वर धाम का नाम

बताया जाता है कि यह चंदेल कालीन प्राचीन मंदिर है. लेकिन इसको बागेश्वर इसलिए कहते हैं क्योंकि इस पहाड़ के आसपास घना जंगल था जिसमें बाघ घूमते थे इसलिए इसे बाघेश्वर कहते थे. हालांकि अब इसको बागेश्वर बोलाते हैं. महादेव की इस मढिया के पास ही बालाजी धाम हनुमान जी महाराज का नया मंदिर बना है. बागेश्वर धाम महाराज के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री इन्हीं बालाजी यानि हनुमानजी के उपासक हैं. कहा जाता है कि उनको इन्हीं बालाजी से सिद्धि प्राप्त हुई.

निकाले जाते हैं भूत—प्रेत

बागेश्वर धाम बालाजी के मंदिर के पास ही एक बड़ा सा पेड़ है जिससे चिपककर कर लोग चीखते चिल्लाते रहते हैं. ये सभी लोग प्रेत बाधा से ग्रसित लोग हैं जो मंगलवार और शनिवार को आते हैं. कहा जाता है कि इस पेड़ में पॉजिटिव एनर्जी है और उसे छूने से इन लोगों के दिमाग में घुसी नकारात्मक शक्ति दूर हो जाती है. यहां पर मंदिर से दूरी बनाने के लिए लगाई गई बैरिकेड पर काले, लाल और पीले रंग की पोटलियां बंधी हुईं हैं जिनमें अलग-अलग श्रद्धालुओं की मन्नतें हैं.

यहां पर मिलते हैं चमत्कारी बाबा धीरेंद्र शास्त्री

इन दोनों मंदिरों के दर्शन कर नीचे उतरने पर यहां पर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री का वो स्थान है जहां वो रहते और जनता से मिलते हैं. पहाड़ी के नीचे ये दो मंजिला इमारत गांव की पंचायत का सामुदायिक भवन है. इसी में धीरेंद्र ने लोगों की आसानी के लिए ठिकाना बनाया हुआ है. इसी परिसर में एक तरफ से लोग आते हैं और दूसरी तरफ से दर्शन कर निकलते हैं. जिन लोगों को मिलना होता है वो उससे धीरेंद्र शास्त्री टोकन व्यवस्था की मदद से समय देकर मिलते है.

ऐसे बढ़ता गया धीरेंद्र शास्त्री का दरबार

आपको बता दें कि जहां धीरेंद्र शास्त्री बैठते हैं वहीं पर पीछे की तरफ उनके दादा संन्यासी बाबा के बैठने का स्थान है. शास्त्री जी के परिवार में पुरोहिताई का काम होता था. इनके दादा भी पुरोहिताई ही करते थे इसका मतलब पर्चा पर कुछ लिखकर भूत भविष्य बताने का कार्य. अपने शुरूआती धीरेंद्र छोटी मोटी पुरोहिताई के बाद रामकथा करते थे. उनको इसके चलते गांवों में कथा से जो मिलता था उसे रख लेते थे. इस बीच सिद्धियों की वजह से बताई गईं बातें सच होने लगीं तो उनका दरबार बढ़ता गया.

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यूट्यूब और कोरोना काल ने किया प्रसिद्ध

आपको बता दें कि कोरोना काल और सोशल मीडिया की वजह से उनका जबरदस्त प्रचार हुआ. लॉकडाउन में लोगों ने घर बैठे खूब कथा सुनी, लाइव प्रसारण देखा और यू-टयूब ने उन्हें देशभर में पहुंचाया. महाराज की बुंदेली बोली, लड़कपन, बोलचाल की अदा अपने बालाजी पर अटूट भरोसे ने ही उनको पिछले 2 साल में ही जबरदस्त लोकप्रिय कर दिया. आपको बता दें कि मंगलवार और शनिवार को गढ़ा गांव में मेला लगता है.