जेपी दत्ता की फिल्म पलटन आज यानि साल सितंबर को रिलीज हुर्इ है। आज के दिन सिर्फ पलटन ही नहीं बल्कि  एकता कपूर और इम्तियाज़ अली के निर्देशन में बनी लैला मजनू और मनोज बाजपेई की गली गुलियाँ भी रिलीज़ हो रही है। लेकिन हम यहां बात पलटन की करेंगे। जे पी दत्त की ये 11वीं फिल्म है।बॉर्डर और एल ओ सी कारगिल जैसी फिल्में बनाने वाले जे पी दत्ता भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास को दिखाने के लिए हमेशा आगे रहते हैं लेकिन इस बार वो पूरे युद्ध नहीं बल्कि एक पलटन की जांबाजी की कहानी लेकर आये हैं।


फिल्म की कहानी सच्ची घटना पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि भारतीय सेना ने चीन से युद्ध हारने के पांच साल के बाद कैसे चीनियों के हौसलों को पस्त किया था बता दें कि मूवी आपको शुरू से ही बांधे रखती है और यही वजह है कि फिल्म आपको कुर्सी पर बैठे रहने के लिए मजबूर करती है। वहीं मूवी ने पहले दिन ही सिनेमाघरों में जबरदस्त ओपनिंग की है।


कहानी फिल्म 'पलटन' में भारत-चीन युद्ध 1962 का जिक्र मिलेगा। साल 1962 में भारत और चीन से युद्ध हुआ था, जिसमें भारत की हार हुर्इ थी। इसके पांच साल बाद 11 सितंबर, 1967 को सिक्किम के नाथुला दर्रा पर भारत-चीन युद्ध शुरू हुआ था। ये मूवी इसी घटना से और भारतीय सेना के जवानों के संघर्षो से रूबरू करावा रही है। दरअसल, उस समय चीनी सेना नहीं चाहती थी कि भारतीय सेना नाथूला से सेबू ला (सिक्किम) तक फेसिंग करे। इस घटना से पूरी तरह रूबरू होने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख लेना होगा। 'पलटन' का बजट तकरीबन 25 करोड़ रुपए का है। लेकिन एेसे कयास लगाउ जा रहे है कि 'पलटन' बॉक्स ऑफिस पर ओपनिंग डे पर एक से तीन करोड़ रुपए का बिजनेस कर सकती है। 


फिल्म में अर्जुन रामपाल ने लेफ्टिनेंट कर्नल राय सिंह और सोनू सूद ने मेजर बिशन सिंह के किरदारों को अच्छी तरह से जिया है। इनके अलावा हर्षवर्धन राणे और गुरमीत चौधरी जैसे यंग एक्टर्स ने भी अच्छी परफॉर्मेंस दी है। लव सिन्हा भी अतर सिंह के किरदार में अच्छे लगे हैं जबकि सिद्धांत कपूर के पास करने के लिए कुछ खास नहीं था। फिल्म में चीनी आर्मी के जवानों का किरदार करने वालों ने अच्छी एक्टिंग नहीं की है। खासतौर पर कुछ-कुछ समय में उनके द्वारा 'हिंदी-चीनी भाई भाई' का नारा लगाया जाना और हिंदी में डायलॉग बोलना अजीब सा लगता है।