भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय Atal Bihari Vajpayee देश निर्माण में युवाओं की भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण मानते थे। उनका स्पष्ट विचार था कि अनुशासित युवा ही देश को नई दिशा दे सकता है। इस बात को याद करते हुए ग्वालियर के जाने-माने साहित्यकार जगदीश तोमर भावुक हो जाते हैं। अटलजी से उनकी मुलाकात युवावस्था में ही हुई थी। अटलजी की आज चौथी पुण्यतिथि है।

ये भी पढ़ेंः मोदी को एक और झटका देने की तैयारी में नीतीश, पशुपति पारस की पार्टी टूटने के कगार पर ?

जगदीश तोमर का कहना है कि एक बार युवाओं का जुलूस निकल रहा था। एक युवा के हाथ में तख्ती थी कि स्कूल, कालेज में हाजिरी नहीं लगनी चाहिए, फीस नहीं लगनी चाहिए। परीक्षाएं भी नहीं होनी चाहिए। मैं भी उसमें शामिल था। अटलजी ने मुझसे पूछा कि आगे क्या करने का विचार है। मैंने कहा कि अभी कुछ सोचा नहीं है। उन्होंने कहा कि एमए प्रथम वर्ष के छात्र हो। अभी तक दिशा ही तय नहीं की। कुछ समय राष्ट्र के लिए भी निकालो। आप लोग ही देश को दिशा दे सकते हो।

जगदीश तोमर, अटलजी के एक रोचक किस्से को याद करते हुए बताते हैं कि मैं उस समय एमएलबी कालेज ग्वालियर में अध्ययनरत था। अटलजी इसी कालेज के छात्र रह चुके थे, इसलिए लोकसभा का पहला चुनाव जीतने के बाद उन्हें सम्मान के लिए आमंत्रित किया गया था। सम्मान समारोह में अटलजी से हम लोगों से संवाद किया। कम उम्र में चुनाव जीतने पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि एक ही चुनाव में तीनों अनुभव हो गए। 

ये भी पढ़ेंः Bihar Cabinet Expansion : नीतीश कैबिनेट का आज होगा विस्तार, राजद कोटे से बन सकते हैं 16 मंत्री, देखिए लिस्ट

पार्टी ने उन्हें तीन संसदीय क्षेत्रों से चुनाव लड़ाया था। एक जगह से जमानत जब्त हो गई। दूसरे लोकसभा क्षेत्र में हार गया और तीसरे से जीतकर आप लोगों के बीच में हूं। तोमर बताते हैं 1957 के लोकसभा चुनाव में अटलजी ने मथुरा, लखनऊ और बलरामपुर से चुनाव लड़ा था। मथुरा में उनकी जमानत जप्त हुई थी, लखनऊ में हार गए थे और बलरामपुर से वह चुनाव जीत गए थे।