चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। शुक्रवार को उनका सुप्रीम कोर्ट में आखिरी दिन था। वह साढ़े 13 महीने तक चीफ जस्टिस के पद पर रहे। उन्हें कई ऐतिहासिक फैसलों के लिए याद किया जाएगा।


गोगोई को उनके फैसलों के लिए याद किया जाएगा। 9 नवंबर को गोगोई ने अयोध्या मामले पर ऐतिहासिल फैसला दिया। जिसके बाद अयोध्या में राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया। रंजन गोगोई के इस ऐतिहासिक फैसले का करोड़ों देशवासियों को इंतजार था। रंजन गोगोई ने देश के 46वें चीफ जस्टिस के तौर पर पिछले साल 3 अक्टूबर को कार्यभार संभाला था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी।

 
आज हम आपको गोगोई के यहां तक पहुंचने की रोमांचक कहानी बताने जा रहे है। बता दें कि बचपन में जब रंजन और उनके बड़े भाई स्कूल जाने लायक हुए तो उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई ने कहा कि उनमें से कोई एक ही गोलपारा के सैनिक स्कूल में पढ़ाई कर सकता है। कौन सैनिक स्कूल जाएगा, इसके लिए टॉस हुआ और रंजन के बड़े भाई अंजन टॉस जीतकर सैनिक स्कूल चले गए।


वहीं दूसरी ओर रंजन को डिब्रूगढ़ के डॉन बॉस्को स्कूल भेजा गया। वहां से वह आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज गए और इतिहास की पढ़ाई की। कॉलेज खत्म करने के बाद रंजन एक बार फिर पिता की इच्छा के अनुसार यूपीएससी की परीक्षा में बैठे। अंजन ने बताया, 'रंजन ने यूपीएससी क्लियर कर लिया लेकिन उन्होंने पापा को बता दिया कि उन्हें कानून में रुचि है।'


बता दें कि गोगोई नॉर्थ ईस्ट से पहले सीजेआई हैं। पांच भाई-बहनों में गोगोई दूसरे नंबर के हैं। 18 नवंबर, 1954 को जन्मे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने डिब्रूगढ़ के डॉन बोस्को स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा अर्जित की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की। असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के बेटे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने 1978 में वकालत के लिए पंजीकरण कराया था। उन्होंने संवैधानिक, कराधान और कंपनी मामलों में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में वकालत की।


उन्हें 28  फरवरी, 2001 को गुवाहाटी उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उनका नौ सितंबर, 2010 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में तबादला किया गया था। उन्हें 12 फरवरी, 2011 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वह 23 अप्रैल, 2012 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किए गए।


एक अंग्रेजी समाचार पत्र से बातचीत के दौरान गोगोई ने बताया था कि आप कभी भविष्य का अनुमान नहीं लगा सकते लेकिन मेरा भाई हमेशा सही रास्ते पर चला। उसने बचपन में कभी खेल में भी कोई बेइमानी नहीं की और अगर कभी मैं बेइमानी करता था तो वह मुझे चैलेंज करता था और नियम न तोड़ने के लिए कहता था।'