कोरोना को दुनिया में तबाही  मचाते हुए 5 महीने गुजर चुके हैं लेकिन अभी तक इसको खत्म करने की दवा नहीं बनाई गई है। आखिर ऐसा क्या है कोविड-19 की इस बिमारी का तोड़ ही नहीं मिल रहा है। काफि कोशिशे करने के बाद भी दुनिया का हर वैज्ञानिक और डॉक्टर को असफलता ही हासिल हुई है। लेकिन कैसे तैसे कर डॉक्टर कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं।


कभी मलेरियारोधी दवा से तो कभी प्लाजमा थेरेपी से इलाज कर रहे हैं। इससे कुछ कोरोना मरीज ठीक भी हो चुके हैं। लेकिन कोरोना वापस से लौट कर आ सकता है इसकी पी संभावना हैं। हाल ही में प्लाजमा थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज करना शुरू किया है। इसमें जो कोरोना से संक्रमित था और वो ठीक हो गया तो उसके शरीर में कोरोना वायरस को मात देने वाली एंटीबॉडिज बन गई है।

इसी एंटीबॉडिज का फायदा उठाते हुए डॉक्टर  दूसरे कोरोना मरीजों में इनका प्लाजमा ट्रांसफर कर ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। बहुत से कोरोना से ठीक हुए लोग अपना ब्लड डोनेट कर रहे हैं ताकी ओर लोगों की जान बचाई जा सकें। लेकिन अभी सामने आया है कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के खून की बिक्री अवैध ढंग से की जा रही है। कोरोना वैक्सीन के नाम पर मरीजों के खून को डार्कनेट पर बेचा जा रहा है।


ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (ANU) ने खुलासा किया है कि सेलर अलग-अलग देशों से शिपिंग करके विदेशों में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के खून डिलीवरी करा रहे हैं। हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि एक लीटर ब्लड का दाम 10 लाख रुपये तक रखा गया है। जिससे कोई आम इंसान नहीं खरीद सकता है। यहीं नहीं बल्कि ब्लड के साथ अवैध रूप से पीपीई, मास्क, टेस्ट किट सहित अन्य सामान भी ऊंचे दाम पर बेचे जा रहे हैं।

दुनिया के इस संकट में कुछ लोग जमकर कमा रहे हैं। महामारी के वक्त आपराधिक तरीके से कमाई करने की कोशिश कर रहे हैं। ANU ने ये भी बताया कि आने वाले दिनों में ये बढ़ भी सकता है। और लोगों की जरूरत के कारण इसे इतने दाम में भी खरीदेंगे। इसलिए कड़ी मॉनिटरिंग की जरूरत है ताकि इसे बंद किया जा सके। हर देश की सरकार को इसके बारे में विचार करने की खास जरूरत हैं।