उत्तराखंड स्थित लैंसडाउन राज्य के गढ़वाल जिले का एक खूबसूरत छावनी शहर है जो भारत के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में गिना जाता है। यह एक ऐतिहासिक शहर है जिसे बसाने का श्रेय भारत में औपनिवेशिक काल के दौरान अंग्रेजों को जाता है। चीड़-देवदार के जंगलों के घिरा यह स्थल बहुत हद तक सैलानियों को आकर्षित करने का काम करता है।लैंसडाउन ब्रिटिश द्वारा बसाया गया हिल स्टेशन है, उस दौरान यहां धार्मिक स्थल(चर्च) और कई भवनों का निर्माण करवाया गया था। वर्तमान में भी आप उस दौर की ब्रिटिश वास्तुकला को यहां की कुछ संरचनाओं के माध्यम से देख सकते हैं। सेंट मैरी चर्च अपनी खूबसूरत दीवारों और रंगीन ग्लास खिड़कियों के लिए सैलानियों के मध्य काफी ज्यादा विख्यात है।आप यहां दरवान सिंह संग्रहालय की सैर का प्लान बना सकते हैं। यह एक वॉर म्यूजियम है जो शहर के मध्य भाग में स्थित है। दरवान सिंह संग्रहालय में सेना के गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट द्वारा लड़े गए विभिन्न युद्धों के यादगार संग्रहों को प्रदर्शित किया गया है। अगर आप बर्फ से ढकी पहाड़ियों के रोमांचक दृश्यों को देखना चाहते हैं तो लैंसडाउन के टिप एन टॉप और स्नो व्यू प्वाइंट जरूर आएं। आप यहां से चौखम्बा और त्रिशूल की बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओ को आसानी से देख सकते हैं। यह व्यू प्वाइंट यहां आने वाले सैलानियों के मध्य काफी लोकप्रिय है। यहां का सूर्यादय और सूर्यास्त देखने लायक होता है। अन्य स्थलों के अलावा आप लैंसडाउन में भीम पकोड़ा स्थल की सैर करना न भूलें। यह दिलचस्प स्थल शहर के बाहरी इलाके की धूरा रोड पर स्थित है। दरअसल यह जगह एक पत्थर के लिए जानी जाती है। माना जाता है कि यहां किसी चट्टानी ढलान पर एक पत्थर रखा हुआ है जो इतना मजबूत है कि कोई भी इसे अपनी जगह से हिला नहीं सकता है।  किवदंती के अनुसार जब पांडव निर्वासन में थे तो भीम ने एक पत्थर एक लैंसडाउन के बाहर एक चट्टान पर रख दिया था।

आप लैंसडाउन के पास प्रसिद्ध तर्केश्वर महादेव के दर्शन कर सकते हैं।  यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।  तर्केश्वर महादेव तक पहुंचने के लिए मुख्य शहर से लगभग 1 घंटे का समय लगता है। तर्केश्वर महादेव देश के सबसे प्राचीन 'सिद्ध पीठों में गिना जाता है। हिन्दू आस्था का बड़ा केंद्र इस पूरे इलाके को पवित्र करता है।