आज के इस ट्रेवल वीडियों में हम बता करने जा रहे है लाचुंग की। लाचुंग भारत के सिक्किम राज्य में एक कस्बा है। यह तिब्बत (चीन) से लगते उत्तरी सिक्किम जिले में स्थित है। लाचुंग 4,700 फुट की ऊंचाई पर लाचेन व लाचुंग नदियों के संगम पर स्थित है। इसे सिक्किम के सबसे सुन्दर ग्राम के रूप में ख्याति प्राप्त है। इसे यह दर्जा ब्रिटिश घुमक्कड़ जोसेफ डॉल्टन हुकर ने 1855 में प्रकाशित हुए द हिमालयन जर्नल में दिया था।

  
लाचुंग लगभग 3,200 मीटर कि ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई पर ठण्ड तो बारह महीने होती है, लेकिन बर्फ गिरी हो तो यहां की सुन्दरता को नया ही आयाम मिल जाता है, जिसकी फोटो उतारकर आप अपने ड्राइंगरूम में सजा सकते हैं, इसीलिए लोग यहां सर्दी के मौसम में भी खूब आते हैं। प्राकृतिक सुन्दरता के अतिरिक्त सिक्किम की विशेष बात यह भी है कि बर्फ गिरने पर भी उत्तर का यह क्षेत्र सुगम रहता है। बर्फ़ से ढकी चोटियां, झरने और चांदी सी झिलमिलाती नदियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्तब्ध कर देती हैं।
 

 
लाचुंग जाने का सर्वश्रेष्ठ समय अक्टूबर से मई तक है। अप्रैल-मई में यह घाटी फूलों से लदी दिखाई देगी तो जनवरी-फरवरी में बर्फ से आच्छादित। हर समय की अलग सुंदरता है। लाचुंग सिक्किम की राजधानी गंगटोक से 117 किलोमीटर दूर है। गंगटोक से यह रास्ता जीप में पांच घंटे में तय किया जा सकता है। लाचुंग से युमथांग घाटी 24 किलोमीटर आगे है। युमथांग तक जीपें जाती हैं। रास्ता फोदोंग, मंगन, सिंघिक व चुंगथांग होते हुए जाता है। जीपें गंगटोक से मिल जाती हैं। ध्यान रहे कि सिक्किम में बाहर से आने वाले जीप-कार आगे का सफर तय नहीं कर सकते। इसलिए वाहन का जुगाड स्थानीय स्तर पर ही करना होगा।


 
भारत-चीन के बीच सीमा व्यापार शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ी है। इससे पहले 1950 में तिब्बत पर चीन के अधिकार से पहले भी लाचुंग सिक्किम व तिब्बत के बीच व्यापारिक चौकी का काम करता था। बाद में यह क्षेत्र लंबे समय तक आम लोगों के लिए बंद रहा। अब सीमा पर स्थिति सामान्य होने के साथ ही पर्यटक यहां फिर से जाने लगे हैं। परिणामस्वरुप यहां कई होटल भी बने हैं। सस्ते व महंगे, दोनों प्रकार के होटल मिल जाएंगे। होटलों की बुकिंग गंगटोक से ही करा लेना सही रहता है।

 
 
सिक्किम बाकी हिमालयी राज्यों की तुलना में अधिक शांत है। प्रति वर्ष गंगटोक में दिसंबर में फूड एंड कल्चर उत्सव होता है। जनवरी में मकर संक्रांति को यहां माघे संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। तीस्ता व रिंगित नदियों के संगम पर यहां बड़ा मेला लगता है जिसमें बडी संख्या में स्थानीय लोग व पर्यटक सम्मिलित होते हैं। इसके अतिरिक्त अलग-अलग बौद्ध मठों के भी अपने-अपने आकर्षक धार्मिक आयोजन होते हैं।