अगर आप भारत में ही फ्रांस में घूमने जैसा आनंद लेना चाहते हैं, तो पुडूचेरी आपके लिए बेहतरीन जगह हो सकती है। यह जगह दिल्ली से 2400 किलोमीटर की दूरी पर है। बता दें कि जीवन की भागदौड़ से थक चुके लोग जो शांति व आध्यात्म की तलाश में हैं, उनके लिए पुदुचेरी बिल्कुल सही जगह है। प्राचीन काल से ही पुदुचेरी वैदिक संस्कृति का केंद्र रहा है। यह महान ऋषि अगस्त्य की भूमि है। पुदुचेरी की आध्यात्मिक शक्ति 12वीं शताब्दी में और बढ़ी, जब यहां अरविदों आश्रम की स्थापना हुई। प्रतिवर्ष सैकड़ों लोग सुकून की तलाश में यहां आते हैं।

 इस पूरे शहर के कोने-कोने में फ्रांसीसी संस्कृति, कला और आर्किटेक्चर की छाप दिखती है। इस शहर में कई महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। यह शहर समुद्र के किनारे बसा हुआ है। इस शहर को बेहतर टाउन प्लानिंग के तहत बसाया गया है। यहां पर फ्रांसीसियों के लिए व्हाइट टाउन नाम की कॉलोनी बनाई गई है। पुडुचेरी आने वाले पर्यटकों के लिए ये पूरी कॉलोनी ही एक टूरिस्ट डेस्टीनेशन है। यदि आप यहां जाना चाहते हैं तो चेन्नई से 135 किलोमीटर दूरी पर पुडुचेरी का एयरपोर्ट है। 

पेराडाइज बीच

यह बीच शहर से 8 किलोमीटर दूर कुड्डलोर मेन रोड के पास स्थित है। इस बीच के एक ओर छोटी खाड़ी है। यहां केवल नाव द्वारा ही जाया जा सकता है। नाव पर जाते समय पानी में डॉल्फिन के करतब देखना एक सुखद अनुभव है। यहां का वातावरण देखकर इसके नाम की सार्थकता का अहसास होता है। यह वास्तव में स्वर्ग के समान है।

ऑरोविल्ले बीच

जैसा कि नाम से ही जाहिर है यह बीच ऑरोविल्ले के पास स्थित है। पुदुचेरी से 12 किलोमीटर दूर इस तट का पानी अधिक गहरा नहीं है। इसलिए पानी में तैरने के शौकीनों के लिए यह बिल्कुल सही जगह है। यहां वीकएंड में समय बिताना लोगों को बहुत भाता है। उस दौरान यहां बहुत भीड़ रहती है।

आनंद रंगा पिल्लई महल

जब यहां फ्रांसीसी शासन थाए तब आनंद रंगा पिल्लई पुदुचेरी के राज्यपाल थे। उनके द्वारा लिखीं डायरियां 18वीं शताब्दी के फ्रांस और भारत संबंधों के बारे में जानकारी देती हैं। यह महल दक्षिणी भाग पर बची हुई कुछ प्राचीन इमारतों में से एक है। इसका निर्माण 1738 में किया गया था। इसका वास्तुशिल्प भारतीय और फ्रेंच शैली का अनूठा मिश्रण है।

गोकिलंबल तिरुकामेश्वर मंदिर

गोकिलंबल तिरुकामेश्वर मंदिर पुदुचेरी से 10 किलोमीटर दूर है। दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के दौरान यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। यह ब्रह्मोत्सव मई-जून के बीच मनाया जाता है। इस उत्सव में मंदिर के 15 मीण् ऊंचे रथ को खींचा जाता है। हजारों भक्तों द्वारा रथ खींचे जाने का दृश्य अदभूत होता है। पुदुचेरी के उपराज्यपाल भी इस यात्रा में भाग लेते हैं। सर्वधर्म समभाव की प्रतीक यह यात्रा फ्रेंच शासन काल के दौरान भी होती थी। उस समय गवर्नर फ्रेंच स्वयं इस रथ को खींचते थे। इसके अलावा यहां 10 हैक्टेयर में फैली ऑस्टेरी झील है जहां पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।