देहरादून। नैसर्गिक सुंदरता से परिपूर्ण उत्तराखंड (Uttarakhand) की वादियां हमेशा से सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रही हैं। अब पर्यटन के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए राज्य के पर्यटन विभाग ने नई पहल की है। 

आने वाले दिनों में चलते-फिरते घर जैसे वाहन यानी कैरावैन से सैलानी यहां के पर्यटक स्थलों की न सिर्फ सैर कर सकेंगे, बल्कि इसी में उनके ठहरने की व्यवस्था भी होगी। इसके लिए वातानुकूलित बसों को लग्जरी सूइट (luxury suite) में बदला जाएगा। पर्यटन एवं छावनी नगर लैंसडौन में इस प्रयोग के सार्थक नतीजे सामने आने से उत्साहित पर्यटन विभाग ने कैरावैन नीति तैयार की है। इसके तहत राज्य में जगह-जगह कैरावैन पार्क बनेंगे।

उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) पर्यटन गतिविधियों से जुड़ा है। बीते साल उसने पर्यटन के क्षेत्र में कुछ नया करने के उद्देश्य से कैरावैन कांसेप्ट को धरातल पर उतारने का निर्णय लिया। निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डा. आशीष चौहान के निर्देशन में निगम की दो वातानुकूलित बस कैरावैन में तब्दील की गईं। इनमें घर जैसी सुविधाएं जुटाने पर प्रति बस करीब आठ लाख रुपये की लागत आई।

कैरावैन में सैर करना और रहना सैलानियों के लिए नया अनुभव है। दो कैरावैन तैयार होने के बाद इन्हें इसी वर्ष अक्टूबर में लैंसडौन में टिप-इन-टाप में खड़ा किया गया। टिप-इन-टाप स्थित निगम के टूरिस्ट हट के प्रबधक नंदादत्त पुरोहित बताते हैं कि अब तक इन दोनों कैरावैन में 16 परिवारों के 40 लोग रह चुके हैं। टिप-इन-टाप आने वाले सैलानियों के लिए कैरावैन आकर्षण का केंद्र भी है। इनमें रहते हुए सैलानी चौखंभा समेत हिमालय की अन्य चोटियों का दीदार कर सकते हैं।