वैसे तो पूरा सिक्किम ही टूरिजम का गढ़ माना जाता है और टूरिस्टों के बीच भी यह काफी मशहूर है, लेकिन आज हम आपको यहां स्थित एक ऐसे लेक यानी झील के बारे में बताएंगे जोकि दुनिया की सबसे ऊंची झीलों में से एक है और अलौकिक खूबसूरती है। इस झील यानी लेक का नाम है गुरुडोंगमार लेक (Gurudongmar lake) जोकि सिक्किम के लाचेन में करीब 5,430 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।


माना जाता है कि जब गुरू नानकदेव जी तिब्बत जा रहे थे तो वह यहां अपनी प्यास बुझाने के लिए रुके थे। अपनी छड़ी से उन्होंने यहां जमी बर्फ में छेद कर पानी पीने की कोशिश की थी और तभी से यहां लेक यानी झील बन गई। कहा जाता है कि भीषण सर्दी के दौरान भी इस झील का कुछ हिस्सा जमता नहीं है और पानी के रूप में ही रहता है।


इस लेक की खूबसूरती की जितनी तारीफ की जाए कम ही है। दूर-दूर तक फैला इसका नीला पानी और चारों तरफ घिरे पहाड़ इसे 'जन्नत' जैसा रूप देते हैं। इस लेक को बौध, सिख और हिंदुओं का पवित्र स्थल माना जाता है।


कैसे पहुंचे
गुरुडोंगमार लेक सिर्फ भारतीय पर्यटक ही जा सकते हैं, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए इस लेक का टूर सिर्फ चोपटा वैली तक ही सीमित है। पर्यटकों के रहने की व्यवस्था लाचेन में है, जोकि इस लेक से 68 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। लाचेन में रात गुजारने के बाद अगली दिन सुबह गुरुडोंगमार लेक की सैर के लिए निकला जा सकता है। ध्यान रहे कि जितनी सुबह इस लेक की सैर के लिए निकलेंगे उतना ही अच्छा होगा क्योंकि ढलते दिन के साथ ही ऊंचाई पर मौसम खराब हो जाता है। ऊंचाई पर सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है, इसलिए पर्यटक लेक घूमने के बाद, जितना जल्दी हो सके, लाचेन वापस आ जाएं। गुरुडोंगमार लेक जाने के लिए आप सिक्किम का टूर पैकेज भी ले सकते हैं या फिर सिर्फ इसी लेक के लिए अलग से पैकेज की भी सुविधा ले सकते हैं।


गुरुडोंगमार का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है और यह भारत के हर हिस्से और जगह से अच्छी तरह कनेक्टेड है। वहीं सबसे नजदीकी हवाई अड्डा सिलीगुड़ी के पास स्थित बागडोगरा है। बागडोगरा पहुंचकर या तो आप बस या कैब ले सकते हैं। सड़क मार्ग से गुरुडोंगमार लेक जाने के लिए सबसे पहले लाचेन जाना होगा क्योंकि रहने-खाने की व्यवस्था वहीं है। यहां से लेक की दूरी 3 या 4 किलोमीटर की है, जो आप या तो अपने पर्सनल वाहन या फिर किसी कैब या कार से भी तय कर सकते हैं।


कब जाएं
चूंकि यह लेक साल के ज्यादातर वक्त जमा ही रहता है, इसलिए यहां जाने का सबसे सही टाइम अप्रैल से जुलाई के बीच का है।