मिजोरम में नर्इ सरकार लेकिन पुराने नियम, नहीं बदला इतिहास, नहीं जीत सकी कोर्इ महिला

Daily news network Posted: 2018-12-12 16:19:47 IST Updated: 2018-12-12 17:08:44 IST
मिजोरम में नर्इ सरकार लेकिन पुराने नियम, नहीं बदला इतिहास, नहीं जीत सकी कोर्इ महिला
  • मिजोरम में विधानसभा चुनाव से स्थिति साफ हाे गर्इ है। दस सालों के बाद एमएनएफ ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर बहुमत हासिल किया।

आइजोल।

मिजोरम में विधानसभा चुनाव की स्थिति साफ हाे गर्इ है। दस सालों के बाद एमएनएफ ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर बहुमत हासिल किया। दस सालों के बाद राज्य में सरकार भले ही बदल गर्इ हो लेकिन इतिहास नहीं बदल सका। इस बार के विधानसभा चुनाव में भी महिलाएं जीत दर्ज करने में सफल नहीं हुर्इ। 2018 के मिजोरम विधानसभा चुनाव में 209 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जिनमें से 15 महिलाएं थी। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा ने सबसे ज्यादा छह महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया लेकिन किसी को भी जीत हासिल नहीं हुर्इ। बता दें कि कांग्रेस ने महज एक महिला उम्मीदवार, जोराम पीपुल्स मूवमेंट ने दो महिलाआें को टिकट दिया था। जबकि एमएनएफ ने एक भी महिला उम्मीवार को टिकट नहीं दिया।

 


बता दें कि 2008 और 2013 की तुलना में इस बार के विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा हुआ हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 142 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे आैर छह महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, इनमें से एक कांग्रेस से, एक एमडीए से, 3 बीजेपी से और एक निर्दलीय थीं। हालांकि उस समय कांग्रेस पार्टी की इकलौती महिला उम्मीदवार हार गई थीं और फिर अगले साल हुए उपचुनाव में वनलालमपुई को टिकट दिया गया। वनलालमपुई ने जीत कर महिलाओं की हार का सिलसिला तोड़ा था। लेकिन 2013 के चुनाव में सभी महिलाआें की जमानत तक जब्त हो गर्इ थी।

 

 

वहीं 2008 में कुल 197 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे जिनमें से कुल नौ महिलाआें के टिकट मिला था। दो महिलाआें को भाजपा, एक को कांग्रेस आैर एक को एमएनएफ ने टिकट दी थी बाकी क्षेत्रिय दलों की आेर से चुनावी मैदान में थी। जिनमें से किसी को जीत हासिल नहीं हुर्इ थी। छह की जमानत जब्त हो गर्इ थी।

 



भाजपा अध्यक्ष जे वी लूना ने कहा था कि जब राजनीतिक दलों से पूछा जाता है कि आपने पहले कभी महिला उम्मीदवारों काे टिकट क्यों नहीं दिया तो उन्होंने कहा कि मिजो महिलाएं राजनीति में रूचि नहीं लेती है। एमएनएफ चीफ आैर पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार जोरामथंगा ने कहा कि 1987 में हमने महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था लेकिन किसी को जीत हासिल नहीं हो पार्इ। इसके बाद हमारे पास  उपयुक्त महिला उम्मीदवार नहीं था जिसे हम टिकट देते। लेकिन रिजनल इंस्टीटयूट आॅफ पैरामेडिकल आैर नर्सिंग साइंस की असिस्टेंट प्रोफेसर आर लालवाम्पुई का कहना है कि महिलाआें ने राजनीति में जाने के बारे में कभी नहीं सोचा क्योंकि उन्हें लगता था कि राजनीति पुरुषों के लिए महिलाआें के लिए नहीं।

 



पहली बार 1978 में बनी महिला विधायक

 मिजोरम में अभी तक सिर्फ  चार महिलाएं विधायक बन पाई हैं। वनलालमपुई राज्य की चौथी महिला विधायक हैं। यहां पहली महिला विधायक 1978 के चुनाव में चुनी गईं थीं, जिनका नाम थनमवई था। एक और महिला नेता लल्हलीमपुई हमर 1987 में राज्य की पहली महिला मंत्री बनी थीं। इन्होंने मिजो नेशनल फ्रंट के टिकट पर चुनाव जीता था। इसके 27 साल बाद 2014 में वनलालमपुई ने राज्य में चुनाव दर चुनाव महिलाओं की हार का सिलसिला तोड़ मुख्यमंत्री ललथनहवला ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया और वह राज्य के इतिहास में दूसरी महिला मंत्री बन गईं।

 



महिला वोटरों की बढ़ती संख्या

 मिजोरम की राजनीति की संरचना करने वाली भी महिलाएं ही हैं। राज्य की महिला वोटरों की संख्या पुरुष वोटरों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में महिलाओं की संख्या अब भी पुरुषों से कम है। यहां प्रति 1000 पुरुषों की संख्या के मुकाबले 976 महिलाएं हैं। हालांकि, 2013, 2014 और 2018 की मतदाता सूची में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही है। ताजा मतदाता सूची के मुताबिक प्रति 1, 000 पुरुषों के मुताबिक राज्य में 1,051 महिला वोटर्स हैं।  2018 की वोटर लिस्ट पर गौर किया जाए तो यहां कुल मतदाताओं की संख्या 7 लाख 68 हजार है। इसमें महिला मतदाता 3 लाख 93 हजार यानी 51.2 फीसदी हैं। वहीं पुरुष मतदाताओं की संख्या 3 लाख 74 हजार है। इनका प्रतिशत 48.8 है।