नेशनल लेवल पर रेफरी बनने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है मौप्रिया, है फुटबॉल की दीवानी

Daily news network Posted: 2018-09-11 16:17:00 IST Updated: 2018-09-11 19:42:14 IST
नेशनल लेवल पर रेफरी बनने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है मौप्रिया, है फुटबॉल की दीवानी
  • मन में अगर कुछ करने के लिए ठान लिया जाए आैर इच्छाशक्ति प्रबल हो तो इंसान बड़े से बड़ा काम भी कर सकता है। कोकराझाड़ की मौप्रिया भौमिक इसका जीता जागता उदाहरण हैं।

गुवाहाटी।

मन में अगर कुछ करने के लिए ठान लिया जाए आैर इच्छाशक्ति प्रबल हो तो इंसान बड़े से बड़ा काम भी कर सकता है। कोकराझाड़ की मौप्रिया भौमिक इसका जीता जागता उदाहरण हैं। मौप्रिया ने विपरीत परिस्थियों में अपनी कठिन मेहनत आैर त्याग के बल पर फुटबाॅल के क्षेत्र में नए मुकाम हासिल किया है। बता दें कि इस समय मौप्रिया फुटबाॅल खेल में सह रेफरी है अौर नेशनल लेवल पर रेफरी बनने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। फुटबाॅल में रूचि ने मौप्रिया को एक अलग पहचान दी है। आज सह रेफरी के रूप में मौप्रिया पूरे असम में फुटबाॅल प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है।

 


 एक क्षेत्रिय समाचार पत्र से बातचीत के दौरान मौप्रिया ने बताया कि वे फुटबाॅल की बहुत बड़ी दीवानी हैं आैर उनकी इसी दीवानगी ने उन्हें आज फुटबाॅल खिलाड़ी से रेफरी तक पहुंचाया है। साथ ही उन्होंने बताया कि बहुत कड़ी मेहनत के बाद वे इस मुकाम तक पहुंच पार्इ हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उनकी इच्छा है कि वे नेशनल लेवल पर फुटबाॅल का आयोजन करें। इसके लिए वे दिन रात मेहनत कर रही है।

 

उन्होंने कहा जब तक उन्हें उनकी मंजिल नहीं मिल जाती उनका प्रयास जारी रहेगा। मौप्रिया ने बताया कि स्कूल के समय से उनका फुटबाॅल की तरफ रूझान रहा है। उनके खेल के प्रति रूचि को देखते हुए 2010 में उनके काॅलेज के प्रोफेसर जयपाल ब्रह्मा उन्हें फुटबाॅल में ले आए थे आैर उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके बाद भारतीय खेल प्राधिकरण कोकराझाड़ के प्रभारी, कोकराझाड़ के जिला खेल संघ के रेफरी बोर्ड के सचिव प्रबीर भट्टाचार्य के प्रयास से मौप्रिया ने फुटबाॅल की विभिन्न प्रतियोगिताआें में हिस्सा लिया आैर अपनी टीम को जीत दिलार्इ। 2016 में असम फुटबाॅल एसोसिएशन के द्वारा सह रेफरी के रूप में चुनी गर्इं। उसके बाद आज तक रेफरी के रूप में वे पूरे असम में फुटबाॅल प्रतियोगिताएं चलाती आ रही हैं। आपको बता दें कि इसके बाद मौप्रिया का लक्ष्य है नेशनल रेफरी बनना।

 

 पिता की मौत के बाद मानसिक रूप से टूट गर्इ थी मौप्रिया

माैप्रिया कोकराझाड़ के गरीब परिवार से हैं। वह अपने माता पिता की इकलौती संतान हैं। मौप्रिया के पिता कमलज भाैमिक का 2011 में स्वर्गावास हो गया था। उसके बाद उनके परिवार की माली हालत बहुत ही खराब हो गर्इ थी आैर वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी। लेकिन खेल के प्रति उनका उत्साव उन्हें दोबारा से खेल में वापस ले आया। माैप्रिया इन दिनों अपनी मां तनुश्री के साथ रहती हैं आैर नेशनल रेफरी बनने की लिए कड़ी मेहनत कर रही है।