मणिपुर की पहली ऑटो ड्राइवर बनीं लाइबी ओइनम, संघर्षों से भरी है इनकी कहानी

Daily news network Posted: 2019-09-30 13:03:33 IST Updated: 2019-09-30 13:03:33 IST
मणिपुर की पहली ऑटो ड्राइवर बनीं लाइबी ओइनम, संघर्षों से भरी है इनकी कहानी

देश में ज्यादातर ऑटो चालक पुरुष हैं। ऐसे में किसी महिला को गाड़ी चलाते देख सब हैरान हो जाते हैं। मगर परिवार की जिम्मेदारी उठाने और खुद को दुनिया के सामने साबित करने की मिसाल लाइबी ओइनम ने पेश की है। 40 साल की उम्र में ऑटो चलाने वाली मणिपुर की वह पहली महिला ऑटो ड्राइवर बन गईं हैं।

 

ओइनम पहले ईंट भट्टे में काम करती थीं। मगर पूरे परिवार का खर्चा उठाने के लिए ये पर्याप्त नहीं था। उन पर मुसीबतों का पहाड़ उस वक्त टूटा जब उनके पति को रेअर डायबिटीज की बीमारी हो गई। ऐसे में उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी गई। इस हालात में गृहस्थी चलाने के लिए ओइनम ने एक प्री पेड ऑटो खरीदा और इसे किराये पर चलाने को दे दिया।

 

उन्होंने बताया कि जब मैंने ऑटो चलाना शुरू किया तो लोगों ने मुझे ताने मारे, मुझे अपमानित किया और मुझे चिढ़ाया। मेरे ऑटो को ट्रैफिक पुलिस रोक देती थी और मुझे सजा भी देती थी। एक बार मैंने कुछ यात्रियों को बिठाने के चक्कर में सिग्नल तोड़ दिया, तभी सामने से पुलिसकर्मी आए और मेरे ऑटो पर डंडे से मारने लगे, जिसके चलते उसका कांच टूट गया। जब मैंने विरोध किया तो उन्होंने मेरे साथ भी दुर्व्यवहार किया। पर मैं अपने काम के लिए अडिग थी, अगले दिन फिर मैं रिक्शा लेकर सड़क पर निकली। मुझे पड़ते तानों का असर मेरे बच्चों पर भी पड़ा, उनकी मां एक ऑटो चालक है, यह सुनकर वे अपमानित महसूस करने लगे, यहां तक कि वे मुझसे भी नफरत करने लगे। घर और बाहर, दोनों तरफ से दबाव आ रहा था, पर मेरी मजबूरी ने मुझे हटने के बजाय और मजबूती दी।

 


वर्ष 2011 में मैं अपने रिक्शे से सवारी लेकर जा रही थी, तभी स्थानीय फिल्म निर्माता मीना लोंग्जाम मुझसे मिलीं। उन्होंने मुझसे कुछ सवाल पूछे, धीरे-धीरे मैंने उनको अपनी सारी कहानी बता दी। कुछ दिनों बाद उन्होंने मुझे कैमरे के आगे बोलने और रिक्शा चलाने को कहा। मुझे तब पता नहीं था कि क्या हो रहा है, पर बाद में उन्होनें बताया कि यह एक फिल्म है, जिसे 2015 में नॉन फिक्शन कैटेगरी में राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इसके बाद लोगों का नजरिया बदल गया। लोग मुझे प्रोत्साहित करने लगे। मेरी कमाई बढ़ी, तो मैंने अपने लिए एक नया ऑटो खरीदा और घर बनाने के लिए कर्ज भी लिया। मेरा बड़ा बेटा अब स्नातक की पढ़ाई कर रहा है और अधिकारी बनना चाहता है।