Women's Day: मिलिए उस मुक्केबाज से जो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ विरोधियों को चटाती हैं धूल

Daily news network Posted: 2019-03-08 17:55:46 IST Updated: 2019-03-08 17:55:46 IST
Women's Day: मिलिए उस मुक्केबाज से जो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ विरोधियों को चटाती हैं धूल

विश्व महिला दिवस के मौके पर आज हम आपको भारत की सबसे खतरनाक मुक्केबाज से मिलवा रहे हैं। ये हैं मैरी कॉम, जो भारत की एकमात्र महिला बॉक्सर हैं, जिन्होंने 6 वल्र्ड चैंपियनशिप के हर मुकाबले में जीत हासिल की है। साल 2014 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं। साल 2006 सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके इलावा भी उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। बचपन से ही उन्हें एथलेटिक्स में रुचि थी। साल 2014 में मैरी कॉम पर एक फिल्म भी रिलीज हुई थी। इसमें उनका किरदार एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने निभाया था।

 

 

पिछले ही साल वियतनाम के हो ची मिन शहर में आयोजित हुए कॉन्टिनेंटल मीट में गोल्ड मेडल जीत कर 35 साल की मैरी कॉम ने एक और इतिहास रचा। वह इस इवेंट में पांच गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली बॉक्सर बन गईं। मैरी कॉम को बचपन में टीवी पर मोहम्मद अली को मुक्केबाजी करते देख बॉक्सर बनने की प्रेरणा मिली। परिवार ने शुरू में विरोध किया। इसके बावजूद ने मैरी कॉम ने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू की और इसके कुछ महीनों बाद ही 2000 में राज्य स्तरीय चैम्पियनशिप जीता। मैरी कॉम कई बार इसका जिक्र कर चुकी हैं जब उन्होंने बॉक्सिंग शुरू की तो कई लोग उनका मजाक बनाते थे।

 

 


तमाम उपलब्धियों के चलते मैरी कॉम को राज्यसभा में भी भेजा गया। वे लागतार संसद सत्रों में हिस्सा लेती हैं। साथ ही वह खेल से जुड़े बैठकों में हिस्सा लेती हैं। मैरी कॉम तीन बच्चों की मां हैं और खुद बताती हैं कि कई बार सभी चीजों को एक साथ लेकर चलना मुश्किल होता है। इसके बावजूद वह अब तक इसमें सफल रही हैं। गौरतलब है कि साल 2012 में लंदन में हुए ओलंपिक में वह क्वॉलीफाई करने वाली एकमात्र भारतीय बॉक्सर रहीं और ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। यही नहीं, 2014 में दक्षिण कोरिया में इंचियोन में हुए एशियन गेम्स में मैरी कॉम ने गोल्ड मेडल जीता और ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला रहीं।