असम: बांग्ला भाषी लोगों की आवाज बनीं थी ज्योत्सना चंदा

Daily news network Posted: 2019-04-10 14:44:27 IST Updated: 2019-04-10 14:44:27 IST
असम: बांग्ला भाषी लोगों की आवाज बनीं थी ज्योत्सना चंदा
  • पूर्वोत्तर राज्य असम की ज्योत्सना चंदा ने असम के कछार से कांग्रेस के टिकट पर 1962 में पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में पहुंचीं। उन्होंने 1967 और 1971 में दूसरी और तीसरी बार भी लोकसभा का चुनाव जीता।

पूर्वोत्तर राज्य असम की ज्योत्सना चंदा ने असम के कछार से कांग्रेस के टिकट पर 1962 में पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में पहुंचीं। उन्होंने 1967 और 1971 में दूसरी और तीसरी बार भी लोकसभा का चुनाव जीता। वे कछार क्षेत्र के बांग्ला भाषी लोगों की आवाज बनीं। जब तक जीवित रहीं कछार में वे अपराजेय रहीं।


 ज्योत्सना का जन्म 28 मार्च 1904 को असम के सिलचर में महेशचंद्र दत्त के परिवार में हुआ। उनकी स्कूली पढ़ाई मिशन गर्ल्स स्कूल में हुई। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई कोलकाता के डायोकेशन कॉलेज में की।

 


 1927 में उनका विवाह स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी अरुण कुमार चंदा के साथ हुआ। वे बंगाली हिंदूओं के बड़े नेता थे। पति की मृत्यु के बाद ज्योत्सना चंदा ने पति की विरासत को आगे बढ़ाया।


 ज्योत्सना 1931-32 में सिलचर में जेल विजिटर के रूप में नियुक्त की गईं। वे असम की पहली महिला जेल विजिटर थीं। उन्होंने सिलचर स्कूल बोर्ड, सिलचर जिला सोशल वेलफेयर एडवाइजरी बोर्ड, एनएफ रेलवे इंप्लाइज यूनियन व टी इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया।

 


 ज्योत्सना 1960 में असम के बांग्लाभाषी लोगों के संगठन की पहली अध्यक्ष चुनी गईं। वे असम स्टेट टेक्सबुक कमेटी, असम स्टेट एडवाइजरी बोर्ड फॉर सोशल एजुकेशन जैसी संस्थाओं से जुड़ी थीं।


 ज्योत्सना पहली बार 1957 में सिलचर पश्चिम से चुनाव जीतकर असम विधानसभा में पहुंचीं। उन्होंने 1961 में 19 मई को सिलचर में भाषा सत्याग्रहियों पर पुलिस गोलीबारी के खिलाफ विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अगले साल लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। ज्योत्सना कछार क्षेत्र के हर शैक्षिक व सामाज कल्याण संगठन से जुड़ी हुई थीं। वे सिलचर के बीटी कॉलेज के प्रबंधन समिति की अध्यक्ष भी रहीं।