Irom sharmila Birthday Special: जानिए राजनीतिक से शादी के बंधन तक का पूरा सफर

Daily news network Posted: 2018-03-14 15:27:51 IST Updated: 2018-03-14 18:48:07 IST
Irom sharmila Birthday Special: जानिए राजनीतिक से शादी के बंधन तक का पूरा सफर
  • 16 साल तक अनशन करने वाली और आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला ने 17 अगस्त 2017 को अपने पुराने मित्र डेसमंड कॉटिन्हो से शादी कर ली थी। इरोम ने तमिलनाडु के कोडइकनाल के उप रजिस्ट्रार के ऑफिस में विवाह किया था।

इंफाल।

पूर्वोत्तर में आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला का जन्म 14 मार्च 1972 को इंफाल में हुआ था। इरोम ने मणिपुर से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम 1958 खत्म करने की मांग को लेकर 16 साल तक संघर्ष किया। आज उनके जन्मदिवस पर हम उनके वैवाहिक जीवन और राजनैतिक संघर्ष से आपको रूबरू करवा रहे हैं।

 


बता दें कि इरोम ने 17 अगस्त 2017 को अपने पुराने मित्र डेसमंड कॉटिन्हो से शादी कर ली थी। इरोम ने तमिलनाडु के कोडइकनाल के उप रजिस्ट्रार के ऑफिस में विवाह किया था। सब-रजिस्ट्रार राधाकृष्णन की उपस्थिति में विवाह सम्पन्न हुआ था, यह एक बेहद सादा समारोह था और इस दौरान वहां दूल्हा-दुल्हन के परिवार के सदस्य मौजूद नहीं थे। इससे पहले युगल ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह किया था। अंतर-धार्मिक विवाह होने के कारण सब-रजिस्ट्रार ने उन्हें विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण कराने के लिए कहा था।

 


बता दें कि इरोम शर्मिला और उनके मित्र डेसमंड कोउटिन्हो की शादी को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी और विरोध में मामला दर्ज कराया गया था। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। यह आपत्ति स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता वी. महेंद्रन ने दायर की थी। आपत्ति खारिज होने के बाद शादी का रास्ता साफ हो गया था। महेंद्रन ने सौंपी गई आपत्ति में कहा था कि यदि यह जोड़ा हिल स्टेशन में रहता है तो इस जगह की कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। बता दें कि इरोम शर्मिला आज अपना 46वां जन्म दिन मना रही हैं। उनका जन्म 14 मार्च 1972 को इंफाल में हुआ था। उनके पिता का नाम इरोम सी नंदा और मां इरोम ओंगबी साक्षी है।

 

 


 


गौर हो कि इरोम को मणिपुर से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम 1958 खत्म करने की मांग को लेकर दुनिया में सबसे लंबे समय तक भूख हड़ताल करने वाली महिला के रूप में जाना जाता है। इसकी वजह 2 नवम्बर 2000 को मणिपुर की राजधानी इंफाल के मालोम में असम राइफल्स के जवानों के हाथों 10 बेगुनाह लोग मारे गए थे। इस घटना ने उन्हें झकझोड़ दिया था। जिसके बाद उन्होंने 4 नवम्बर 2000 को अपना अनशन शुरू किया था, इस उम्मीद के साथ कि 1958 से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा में और 1990 से जम्मू-कश्मीर में लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (एएफएसपीए) को हटवाने में वह महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चल कर कामयाब होंगी। हालांकि  16 वर्षो के बाद नौ अगस्त 2016 को आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी।

 

 

 

 


जब उन्हें लगा कि भूख हड़ताल से सरकार उनकी मांग नहीं मानने वाली है तो इसके बाद उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। मणिपुर विधानसभा चुनाव 2017 में राज्य के मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के खिलाफ चुनावी समर में कूदीं 'आयरन लेडी' इरोम शर्मिला थौबल (थउबल) सीट से उन्हें हार का सामना करने पड़ा था। इस चुनाव को लड़ना उन्हें काफी महंगा साबित हो रहा था। वे साइकिल पर प्रचार करते देखी गईं। वो अपना नामांकन भरने भी साइकिल पर गई थीं। ऐसे में इरोम शर्मिला की मदद के लिए आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इरोम शर्मिला और उनकी पार्टी को 50 हजार रुपए का चंदा दिया था। इसके अलावा इरोम ने क्राउड फंडिंग से लगभग 4.5 लाख रुपए जुटाकर चुनाव लड़ा था। इससे पहले भी 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने इरोम को आप के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा था। लेकिन इरोम ने इंकार कर दिया था। मणिपुर की आयरन लेडी PRAJA (Peoples' Resurgence and Justice Alliance) पार्टी प्रमुख इरोम शर्मिला ने चुनावी मतगणना से पहले ही कह दिया था कि यदि वह इन चुनावों में हारती हैं, तो वह अगली बार 2019 में फिर से चुनाव लड़ेंगी।